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Baghpat News: गुरुवाणी सुनने का सौभाग्य सभी को नहीं मिलता

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सागरफोटो संख्या 2
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बड़ौत। जैनाचार्य विशुद्धसागर ने कहा कि प्रभु दर्शन एवं संत-समागम दुर्लभ हैं। धन्य हैं वे मनुष्य जो प्रातकाल उठकर प्रभु भजन एवं गुरु सेवा करते हैं। श्रेष्ठ पुरुषों को प्रभु भजन, गुरु सेवा कर अपने जीवन को पवित्र बनाना चाहिए।
जैनमुनि बुधवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जो सज्जन-मनुष्य गुरुओं को दान एवं प्रभु पूजा करता है, उसके पाप रूप कर्मों का क्षय होता है, पुण्य की वृद्धि होती है, परिणाम विशुद्ध होते हैं, लोक में यश फैलता है। सिद्धि होते ही प्रसिद्धि होती है। प्रभु भक्ति से पूर्व संचित कर्मों का क्षय होता है और सिद्धियां स्वयमेव सिद्ध होने लगतीं हैं। चित्त शांत करना है तो स्वाध्याय शील बनो। अध्ययन से चित्त एकाग्र होता है। अध्ययनशील ही ध्यान-साधना में प्रविष्ट हो पाता है। दैव (भाग्य) और पुरुषार्थ दोनों के होने पर ही कार्य सिद्धि संभव है। भक्ति मार्ग का अनुशरण करो। कर्म-सिद्धांत को जानो। कण-कण स्वतंत्र है। स्वयं का किया पुण्य-पाप ही तुम्हारे सहायक है। जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल प्राप्त होगा। सभा का संचालन पंडित श्रेयांस जैन ने किया। सभा में धनेंद्र जैन, राजकुमार जैन, धनपाल जैन, राकेश जैन आदि शामिल रहे।
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पंच कल्याणक महोत्सव की तैयारियां शुरू
मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के सानिध्य में आगामी 17 से 22 नवंबर तक चैत्य वृक्ष मन्दिर जिनबिम्ब पंच कल्याणक महोत्सव की वेदी भूमि पूजन की मांगलिक क्रिया 2 नवंबर को सुबह 8 बजे दिगंबर जैन कॉलेज के सी फील्ड में संपन्न होगी। कार्यक्रम को सफल बनाने में बड़ौत दिगंबर जैन समाज समिति के अध्यक्ष प्रवीण जैन, संयोजक अतुल जैन, सुनील जैन, सुभाष जैन, आलोक मित्तल, सतीश सराफ, बालकिशन जैन शामिल रहे।
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