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बागपत में नहीं आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम

Thu, 14 Apr 2016 12:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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बागपत पुलिस लाइन स्थित फायर स्टेशन। - फोटो : amar ujala
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बागपत। सर बागपत कंट्रोल रूम से बोल रहा हूं, हमारे यहा आग लग गई है। जल्दी दमकल विभाग की टीम भेज दो... जी हां बागपत में किसी भी जगह पर जरा भी भयंकर आग लग जाती है तो यहां के कर्मचारी गाजियाबाद और मेरठ फायर स्टेशनों पर फोन करना शुरू कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि जब तक यहां पर गाड़ी पहुंचती है तब तक आग में सामान खाक हो चुका होता है। 
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 बागपत को जनपद का दर्जा मिले साढ़े 18 साल बीत गए, लेकिन यहां की स्थित में कोई ज्यादा सुधार नहीं हुआ। दमकल विभाग की व्यवस्था राम भरोसे है। जरा सी भी आग लगने की घटना की स्थिति में बागपत आज भी मेरठ, गाजियाबाद और मुजफ्फरनगर का मुंह ताकता है।

शायद ही कोई घटना ऐसी होगी, जिस पर समय से आग बुझाने के लिए दमकल विभाग की टीम पहुंच गई होगी। अधिकतर तो आग में सामान तबाह होने के बाद ही दमकल विभाग की टीम पहुंचती है। कई जगह तो लोग टीम के लिए चिल्लाते रहतेे हैं, लेकिन वहां पर अंत तक दमकल विभाग की टीम नहीं पहुंच पाती है। छोटी-मोटी घटना के लिए तो यहां व्यवस्था है। जरा भी भयंकर आग लग जाती है तो पुलिस और फायर ब्रिगेड के कर्मचारी मेरठ और गाजियाबाद फायर स्टेशनों पर फोन खड़खड़ाने लगते हैं। जब तक यहां पर गाड़ी पहुंचती है आग सब कुछ खाक कर देती है।
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 घटना के बाद भी नहीं हुए पुख्ता इंतजाम  
बागपत। डौला गांव में 17 सितंबर 2014 की रात गैस के टैंकर में भयंकर आग लग गई थी। बागपत के अलावा गाजियाबाद और मेरठ की फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची थी। इसके बावजूद 17 घंटे बाद आग पर काबू पाया गया था। इसमें कई लोगों के मकान जल गए थे। फिर भी अफसर बागपत में आग बुझाने के पुख्ता इंतजार नहीं कर पाए हैं। 

जल्दी बताओ कैसी लगी आग, उसी के हिसाब से होगा इंतजाम 
बागपत। आग लगने की जैसे ही फायर ब्रिगेड या पुलिस के पास सूचना दी जाती है, उसी समय उनका एक ही सवाल होता है कि भाई ये बता दो आग कम लगी या ज्यादा, उसी के हिसाब से इंतजाम किया जाएगा। 

जलते रहे पशु नहीं पहुंची फायर ब्रिगेड 
केस 1 : सरूरपुर गांव में 30 मार्च को किसान इंद्रपाल के छप्पर में आग लग गई थी। इसमें एक भैंस की झुलस जाने से उसी समय मौत हो गई थी। जबकि एक गाय और एक भैस गंभीर झुलस गई थी। लोग दमकल विभाग की टीम के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन वहां पर गाड़ी नहीं पहुंची। 
केस 2 : खेकड़ा निवासी सब्बीर के छप्पर में 5 अप्रैल को रहस्यमय ढंग से आग लग गई। सूचना देने के घंटे बाद दमकल कर्मी वहां पर पहुंचे, तब तक पशु बुरी तरह से झुलस चुके थे। लोगों ने खुद ही आग पर काबू पाया था। 
केस 3 : बागपत चीनी मिल में 7 अप्रैल को बेगास में अचानक आग लग गई थी। कर्मचारियों की सजगता से आग पर काबू पा लिया। जब तक दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची तब तक आग पर बुझ चुकी थी।

गर्मी में लगती है सबसे ज्यादा आग 
बागपत। गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा आग लगती है। गेहूं और गन्ने की फसलों में हाईटेंशन लाइन की चिंगारी या अन्य कारणों से आग लगती है। 

तीस साल से फायर स्टेशन के लिए नहीं मिली जगह
बागपत। दमकल विभाग के प्रभारी सीओ एपी सिंह ने बताया 30 साल पूर्व बड़ौत में फायर स्टेशन बनाने की घोषणा हुआ थी। अभी तक उसके लिए जमीन नहीं मिली। बागपत में पुलिस लाइन में ही फायर स्टेशन बना दिया। 

 आग लगने की हर सूचना पर पहुंची है फायर ब्रिगेड : सीओ 
फायर बिग्रेड के प्रभारी सीओ एपी सिंह ने कहा जनपद में आग लगने की हर सूचना पर दमकल विभाग की टीम पहुंचती है। भयंकर आग लगती है तो दूसरे जनपदों के फायर स्टेशन से गाड़ी मंगवाई जाती है, लेकिन पिछले काफी समय से ऐसी जरूरत नहीं पड़ी है। बागपत में फायर बिग्रेड की काफी अच्छी व्यवस्था है। फायर ब्रिगेड के पास तीन बड़ी और दो छोटी गाड़ी हैं। तीनों तहसील में बड़ी गाड़ी है। 
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