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कहीं सुफर्नखा की नाक कटी तो कहीं खर वध की लीला का मंचन किया

Mon, 10 Oct 2016 01:46 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
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बागपत में रामलीला का मंचन करते कलाकार। - फोटो : अमर उजाला
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बागपत।  रामलीलाओं के मंच पर विभिन्न लीलाओं का कलाकारों ने प्रदर्शन किया। इसे देखकर दर्शक तालियां बचाने से पीछे नहीं रहे। कहीं सुफर्नखा की नाक कटी तो कहीं खर, दूषण और मेघनाथ, कुंभकर्ण के वध की लीला का मंचन किया। 
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   बागपत के बड़ा बाजार में चल रही आदर्श रामलीला कमेटी के मंच पर कलाकारों सुफर्नखा की नाट काटी, राम लक्ष्मण के हाथों खर और दूषण का वधन की लीला दिखाई । इसको देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। संजय फौजदार, नीरज चौहान, अनुज, देवेंद्र, ईलू, भीम का सहयोग रहा।

श्री रघुवर रामलीला समिति के मंच पर विभिन्न लीलाओं का मंचन किया। इसमें संजय रूहेला, सुजीत लखेरा, अनुज, जोंटी, मनोज का सहयोग रहा। 

अमीनगर सराय के शिव मंदिर में चल रही रामलीला में हनुमान जी का लंका से सुसेन वध को लाना और संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण को जीवत करना, मेघनाथ और कुंभकर्ण का वीरगति को प्राप्त हो जाना की लीला दिखाई। बबली प्रजापति, भविंद्र पाठक, सुशील शर्मा, महेश शर्मा, वरुण पाराशर, राकेश गुप्ता, नवीन गुप्ता, महेश, यज्ञदत्त शर्मा, पप्पू लाला, संदीप,अनिल शर्मा, नीटू मित्तल, पवन रहे।
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चांदीनगर के रटौल में चल रही रामलीला में कुंभकर्ण और मेघनाथ वध के बाद सुलोचना सती का मंचन किया। ब्रजलाल, प्रवीण गुप्ता, बंटी, रोहित, लीलू, पम्मी, महेंद्र शर्मा आदि रहे।

खेकड़ा के बड़ा बाजार स्थित गांधी प्याऊ पर श्री धार्मिक रामलीला कमेटी के तत्वावधान में चल रही रामलीला में शनिवार की रात्रि सर्वप्रथम रोहताश धामा ने राम लक्ष्मण और सीता की आरती कर रामलीला के मंचन का शुभारंभ किया।

इसके बाद हनुमान सीता माता का पता लगाकर वापस लौटते हैं। नल एवं नील समुद्र पर लंका जाने के लिये पुल का निर्माण करते हैं। राम शांति दूत के रूप में अंगद को रावण के पास लंका में भेजते हैं। अंगद रावण को समझाते है  सीता को ससम्मान वापस लौटाओ। इसी में भलाई है।

रावण के आक्रोशित होने पर अंगद अपना पैर जमाकर कहते है कि मेरा पैर कोई यदि तुम्हारा वीर हिला देगा तो भगवान राम हार मान लेंगे। रावण का कोई भी वीर अंगद के पैर को टस से मस नहीं कर पाता।
अंगद युद्ध की घोषणा कर लौट गए और राम को इस संबंध में बताते हैं। इसके बाद लक्ष्मण, मेघनाथ का युद्ध होता है। इसमें मेघनाथ ब्रहमास्त्र से लक्ष्मण को मूर्छित कर देता है। इससे लंका में मेघनाथ ही जयकार होती है। इसमें  डायरेक्टर उमेश शर्मा, राजा शर्मा, प्रधान पुनीत शर्मा, तरुण गुप्ता, नवाब सिंह धामा, नरेश शर्मा, दीपक शर्मा, मुकेश शर्मा, संजीव जैन, कपिल शर्मा, अनिरुद्ध , राजू, राजेंद्र कुमार, श्रद्धानंद पांचाल, प्रवीण आदि रहे। 
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