-ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में आचार्य विशुद्धसागर महाराज ने किया प्रवचन
बड़ौत। आचार्य विशुद्धसागर महाराज ने कहा कि समाज, देश, विश्व में एकता का मूल-सूत्र यदि कोई है, तो वह 'अहिंसा है। अहिंसा एकता और विश्वशांति का उपाय है। भगवान महावीर स्वामी के सूत्र पर दृष्टिपात करने की आवश्यकता है। जियो और जीने दो।
जैनमुनि सोमवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जीना मनुष्य का अधिकार है तो जगत के प्राणियों को जीने देना हमारा कर्तव्य है। अधिकारों के साथ हमें अपने कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए। कहा कि गुरुओं की वाणी सुनकर, उनके अनुसार विचारधारा तदनुसार आचरण करने से ही परम-सुख प्राप्त हो सकता है। श्रद्धा-आस्था मात्र से कल्याण नहीं हो सकता है। विश्वास के साथ आचरण भी आवश्यक है। बीमार व्यक्ति को मात्र औषधि का ज्ञान स्वस्थ नहीं कर सकता है। दवाई के ज्ञान के साथ, पथ्य भोजन एवं औषधि सेवन भी करना पड़ेगा। ज्ञान के साथ आचरण ही विशुद्ध-परिणाम बना सकता है। चर्चा के साथ चर्या भी करो। उन्होंने कहा कि जो गुरु का अनुसरण करे। वही सच्चा शिष्य होता है। गुणों में अनुराग करना 'भक्ति' है। कर्म और आत्मा को भिन्न करना मुक्ति है। सभा का संचालन पंडित श्रेयांस जैन ने किया। सभा में विनोद एडवोकेट, दिनेश जैन, राकेश सभासद, मनोज जैन, धनेंद्र अमित जैन, विवेक जैन, अशोक जैन आदि शामिल रहे।