नोटबंदी के चलते बैंक से रुपये नहीं मिलने के कारण गांव डौलचा के किसान की मौत हो गई। किसान के परिजनों का कहना है कि रुपये नहीं मिलने के कारण उनका उपचार नहीं करा पाए। इस हादसे के बाद किसान के परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
डौलचा गांव निवासी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके पिता चरण सिंह (60) पिछले छह दिनों से बीमार चल रहे थे। निजी चिकित्सक से उपचार कराया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ।
मेरठ या किसी अन्य जगह पर उपचार करने के लिए उनके पास रुपये नहीं थे। परिजनों ने बताया कि कई बार बैंक गए, घंटे लाइन में भी लगे, लेकिन उनको रुपये नहीं मिले। बिना पैसे समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण उनके पिता की हालत ओर बिगड़ गई।
शुक्रवार की रात में उनकी मौत हो गई। वीरेंद्र का कहना है कि उनको समय से बैंक से रुपये मिल जाते तो उनके पिता की जान न जाती। बैंक सेपैसे नहीं मिलने के कारण परिवार सही तरह से इलाज भी नहीं करा सका।
जिले में दो दिन में किशोर समेत तीन की गई जान
बागपत। बैंक से रुपये न मिलने के कारण दो दिन में तीन मौत हो चुकी है। जूते के लिए रुपये न मिलने के कारण रटौल के दिलशाद ने आत्महत्या कर ली थी। वहीं, शेखपुरा गांव में बेटी की शादी के लिए रुपये न मिल पाने के गम में व्यक्ति की जान चली गई। इससे पहले निवाड़ा गंाव में एक किशोरी की बीमार से मौत हो गई थी। परिजनों को उपचार के लिए रुपये नहीं मिले थे।