पश्चिम उत्तर प्रदेश के छह जिलों में प्रदूषित जल से प्रभावित गांवों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति नहीं करने पर एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। शेष 103 गांवों में पेयजल आपूर्ति कराकर रिपोर्ट 31 दिसंबर तक मांगी गई है। अगली सुनवाई के लिए दो फरवरी 2021 की तिथि तय की गई।
दोआबा पर्यावरण समिति के अध्यक्ष वैज्ञानिक डॉ. चंद्रवीर राणा ने बताया हिंडन, कृष्णा और काली नदी के किनारे बसे गांवों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए वह एनजीटी में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। नदियों के किनारे सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ और गाजियाबाद के गांव प्रभावित हैं। एनजीटी ने शासन से शुद्ध पेयजल आपूर्ति की रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन अभी तक 103 गांव में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति नहीं हो सकी है।
एनजीटी ने पंचायती राज विभाग की रिपोर्ट पर असंतोष जताया। इन जिलों के गांवों में 31 दिसंबर तक आपूर्ति कर रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए। मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि जिन अधिकारियों ने लापरवाही की है, उन पर एक महीने के अंदर कार्रवाई की जाए। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराया जाए। टैंकरों से भेजे जा रहे पानी की सप्लाई की जांच होनी चाहिए। राणा ने बताया 21 अक्तूबर 2019 को यह मामला एनजीटी में रखा था, इसके बाद एनजीटी ने सख्ती दिखाकर प्रभावित गांवों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति के आदेश दिए थे।
जिले के 51 गांव प्रभावित
हिंडन और कृष्णा नदी किनारे बसे 51 गांव प्रभावित हैं। जल निगम ने एनजीटी में जो रिपोर्ट दाखिल की है, इसमें कहा गया है कि 27 गांव में पाइप पेयजल योजना पर काम चल रहा है। 22 गांव कवर कर लिए गए हैं। बिराल समेत दो गांव में जमीन उपलब्ध नहीं है। इसके लिए प्रयास चल रहे हैं।
राणा ने कहा कि जारी रहेगा संघर्ष
वैज्ञानिक डॉ. चंद्रवीर राणा का कहना है कि उनका संघर्ष जारी रहेगा। चौगामा क्षेत्र के लोग प्रदूषित जल के कारण बीमारियां झेल रहे हैं। जल जनित बीमारियों के कारण आए दिन लोगों की मौत हो रही हैं। इससे पूरे क्षेत्र के लोग परेशान हैं।