बड़े भाई के सामने ही सीने से सटाकर मारी गोली
बड़ौत(बागपत)। हिमालयन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर गुलबीर सिंह की हत्या उनके ही बड़े भाई अमित सिंह के सामने की गई। अचानक हत्यारे आए और गुलबीर के सीने में सटाकर गोली मारी। देर रात तक पुलिस हत्यारोपियों को पकड़ने के लिए दबिश दे रही थी।
गुलबीर सिंह कई दिन से बीमार चल रहे थे। इस कारण कई दिन से कालेज नहीं आ रहे थे। वहीं शबगा गांव का अंशुल पंवार गुलबीर के कालेज आने का इंतजार कर रहा था। बताया गया कि कुछ दिन पहले गुलबीर और अंशुल के बीच कहासुनी हुई थी। शुक्रवार को कई दिन बाद गुलबीर सिंह कॉलेज पहुंचे थे। महज आधा घंटा बैठने के बाद वह दोपहर करीब 12.45 बजे घर जाने लगे। कार के पास गुलबीर सिंह, उनका बड़ा भाई अमित सिंह और चालक गौरव खड़े थे। तभी अंशुल अपने दो साथियों के साथ वहां बाइक से पहुंचा। उनमें से एक युवक ने अचानक तमंचा निकाला और फायर कर दिया। इसके बाद तीनों तमंचा लहराते हुए फरार हो गए। अपने सामने ही भाई को गोली लगने पर अमित सकते में आ गए। कुछ देर तक तो उन्हें समझ ही नहीं चला कि हुआ क्या है। गुलबीर के शरीर से खून निकला और वे गिर पड़े, तब जाकर अमित होशोहवास में आए। अमित का कहना था कि उन्हें नहीं पता था कि एक छात्र मामूली कहासुनी होने पर उनके भाई की हत्या कर देगा। यदि उन्हें भनक लग जाती तो वे सुरक्षा के इंतजाम करते।
गार्ड को तमंचा दिखाकर गेट खुलवाया
भागते समय कालेज के मुख्य द्वार पर तैनात गार्ड ने बाइक रुकवाने की कोशिश की तो हमलावरों ने उसे भी तमंचा दिखाकर धमकाया और भाग गए। महज पांच मिनट के भीतर ही तीनों आए और वारदात करके फरार हो गए।
सीसीटीवी में कैद हुआ अंशुल पंवार
एएसपी अनिल कुमार सिंह, सीओ आलोक सिंह, थाना प्रभारी अजय शर्मा वारदात के बाद मौके पर पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज खंगाली। सीसीटीवी में कॉलेज का ही प्रथम वर्ष का छात्र अंशुल पंवार पुत्र ओमप्रकाश निवासी शबगा पहचान में आया। उसके दोनों साथियों की रात तक पहचान नहीं हो सकी थी। पुलिस ने डीवीआर को कब्जे में ले लिया।
परिजनों का बुरा हाल
गुलबीर की मौत पर पत्नी अंशु की आंखों से बहते आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। गुलबीर की मां कृष्णा का भी बुरा हाल था। सबसे बड़ा भाई बबलू भी रोते-रोते बदहवास हो रहा था।
आईजी मेरठ ने किया घटनास्थल का दौरा
शाम के समय आईजी जोन मेरठ प्रवीण कुमार ने घटनास्थल का दौरा किया और पुलिस को जल्द खुलासे का निर्देश दिया। वारदात के खुलासे के लिए पांच टीमें बनाई गई हैं।