फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दो माह से मानदेय के लिए तरस रहे मनरेगा मजदूर

विज्ञापन
विज्ञापन
काम भी लिया, लेकिन मजदूरी देने में अफसरों ने खड़े किए हाथ
विज्ञापन

आर्थिक तंगी का भी संकट गहराया, उठानी पड़ रही परेशानियां
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। मनरेगा मजदूर काम करने के बावजूद मजदूरी के लिए तरस रहे है। दो माह से मजदूरी नहीं मिली है। जिम्मेदार अफसर भी हाथ खड़े कर चुके है। ऊपर से बजट न आने की बात कही जा रही है। इससे मजदूर और उनके परिवारों पर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
बड़ौत ब्लाक के अंतर्गत 1666 मनरेगा मजदूर पंजीकृत है। पंजीकृत मजदूरों से समय-समय पर शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के अंतर्गत पेड़-पौधों में पानी देना, पेड़ों की देखरेख करना, सिंचाई नाली व नालों की सफाई-खोदाई का कार्य करना व चकरोड मरम्मत का काम कराया जाता है। इसके बदले मजदूरों को मजदूरी के नाम पर 204 रुपये प्रतिदिन मिलते है। गत वर्ष नवंबर से इन 1666 मजदूरों को मजदूरी नहीं मिली। इससे मजदूर परेशान है।
विज्ञापन

ब्लॉक के ग्राम शबगा के मनरेगा मजदूर प्रदीप का कहना है कि उसने शासन की गाइडलाइन के तहत 100 दिन काम पूरा कर रखा है। इसके बावजूद उसे बीते नवंबर से मजदूरी नहीं मिल रही है। परिवार चलाने के लिए मजदूरी ही सहारा थी, अब तंगी का सामना करना पड़ रहा है। यदि जल्द मजदूरी नहीं मिली तो मजबूरन मनरेगा से मुंह मोड़ना पड़ेगा।
विज्ञापन

अलावलपुर गांव के मनरेगा मजदूर महिपाल ने भी 100 दिन का काम पूरा कर रखा है। इसके बावजूद महिपाल को भी मजदूरी नहीं मिली। उसका कहना है कि यदि समय पर पैसा नहीं मिलेगा तो मजदूर क्या करेगा। मजदूरी से ही घर चलता है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
फिलहाल ऊपर से पैसा नहीं आया। जैसे ही पैसा मिलता है, तत्काल प्रभाव से मजदूरों के खाते में डाल दिया जाएगा। - ज्योति बाला, बीडीओ।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें