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Baghpat News: दूध का उत्पादन रोजाना चार हजार लीटर, मावा बन रहा था पांच हजार किलो

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दूध का उत्पादन रोजाना चार हजार लीटर की खबर से संबं​धित फोटो। धनौरा सिल्वरनगर में मावा की जांच क
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- मिलावटी मावा व पनीर बनाने के लिए बदनाम गांव होता जा रहा धनौरा सिल्वरनगर
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- दिल्ली सप्लाई किया जाता था मावा, तीन दिन पहले हुई कार्रवाई से 14 भट्ठियां बंद
- भट्ठियों में पाउडर, वनस्पति घी, रसायन से तैयार किया जाता था मिलावटी मावा
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। धनौरा सिल्वरनगर गांव में दूध का उत्पादन रोजाना चार हजार लीटर होता है और यहां मावा पांच हजार किलो बन रहा था। यह सुनकर थोड़ा अजीब लगता है मगर यहां मिलावटी मावा व पनीर बनाने की 14 भट्ठियां चलतीं हैं। मिलावटी मावा व पनीर के कारण ही गांव बदनाम होता जा रहा है।
पशुगणना के अनुसार गांव में 500 भैंस व गाय हैं और यहां रोजाना चार हजार किलो दूध का उत्पादन होता है। यह दूध गांव में घरों व डेयरी पर बेचा जाता है और लोग इसको घरों में इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद भी गांव में चल रही 14 भट्ठियों पर रोजाना पांच हजार किलो मावा तैयार हो रहा था। इसे रात में तैयार करके सुबह दिन निकलने से पहले दिल्ली सप्लाई कर दिया था।
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त्योहारों के कारण पिछले एक सप्ताह से वहां इतनी ज्यादा मात्रा में मिलावटी मावा तैयार किया जा रहा था। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने वहां महताब, इकबाल, मेहरबान की भट्ठियों पर तीन दिन पहले छापा मारकर डेढ़ हजार किलो मावा जब्त करके नष्ट कराया। इस कार्रवाई के बाद से कुछ दिन के लिए वहां भट्ठियां बंद कर दी गई मगर मामला शांत होते ही उनको दोबारा शुरू कर दिया जाता है।
- इन गांवों में भी तैयार हो रहा मिलावटी मावा
धनौरा सिल्वरनगर के अलावा लूंब, बसौद, पांची, ख्वाजा नंगला, झूंडपुर, बामनौली, किरठल, फौलादनगर, बड़ौली, ट्योढ़ी, कैड़वा गांवों में भी मिलावटी मावा तैयार हो रहा है। यहां तैयार होने वाला अधिकतर मावा दिल्ली में सप्लाई किया जाता है।
- इस तरह तैयार होता है मिलावटी मावा
त्योहारों के मौके पर मावे की डिमांड बढ़ जाती है लेकिन दूध के कम उत्पादन के चलते शुद्ध मावा नहीं बनाया जाता। इसलिए मिलावटी मावे का कारोबार बढ़ रहा है। मिलावटी मावा बनाने के लिए पाउडर, रिफाइंड, वनस्पति घी, रसायन का इस्तेमाल होता है।
- मावे और मिठाइयों के 45 प्रतिशत नमूने फेल
खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त डीपी सिंह के अनुसार जिले में मावे व मिठाइयों के 45 प्रतिशत नमूने फेल हो जाते हैं। जिनके प्रतिष्ठान के खाद्य पदार्थों के नमूने फेल होते हैं, उनको नोटिस जारी करने के साथ ही न्यायालय में वाद दायर कराया जाता है। वहां आरोप सिद्ध होने पर उनपर जुर्माना व सजा की कार्रवाई होती है। इनके अलावा मावे व मिठाइयों को मौके पर नष्ट भी कराया जाता है। अब मोबाइल वैन लैब होने से उससे शुरुआती जांच हो जाती है।
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इस तरह खतरनाक होता है मिलावटी मावा
डिप्टी सीएमओ डॉ. विभाष राजपूत का कहना है कि मिलावटी मावे से सबसे ज्यादा किडनी को नुकसान होता है। इससे पेट की बीमारियां होती हैं तो इससे हृदय पर असर पड़ता है। इनके साथ शरीर के सभी अंग प्रभावित हो जाते हैं।
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