कोरोना का एक साल
- लॉकडाउन के वक्त कई संगठन जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आए
- किसी ने घर में बनाकर बांटे मास्क, किसी ने सैनिटाइजर
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। कोरोना महामारी में लॉकडाउन के वक्त कई संगठन जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आए। वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने किसी संगठन का इंतजार नहीं किया। ये लोग अकेले ही जरूरतमंदों की सहायता के लिए घरों से निकल पड़े। लॉकडाउन के दौरान मास्क और सैनेटाइजर जिंदगी का अहम हिस्सा हो गया था। मेडिकल स्टोरों पर भी मास्क और सैनिटाइजर कमी हो गई थी और ये आसानी से नहीं मिल रहे थे। कीमत भी ज्यादा वसूली जा रही थी। ऐसे में ये लोग सामने आए। किसी ने बाजार से खरीदकर तो किसी ने खुद अपने हाथ से मास्क तैयार कर लोगों को वितरित किया। ऐसे लोगों ने जमाने को मानवता का संदेश दिया।
यमुना इंटर कॉलेज के शिक्षक अशोक बंधु ने लॉकडाउन के दौरान लोगों को मास्क का वितरण किया। इस काम में उन्होंने कॉलेज के स्काउट-गाइड के बच्चों को भी अपने साथ लिया। बच्चों को मुसीबत के समय एक-दूसरे की मदद करने की सीख दी।
सर्वोदय पब्लिक स्कूल की शिक्षिका शिवानी शर्मा ने लॉकडाउन के दौरान मास्क की कमी देखी तो घर में ही इन्हें तैयार करने की ठान ली। सिलाई मशीन पर कई-कई घंटे काम करके उन्होंने मास्क तैयार किए। पिता राजपाल शर्मा, मां सुनीता शर्मा, भाई अनिरुद्ध शर्मा की सहायता से अपने हाथों से बनाए मास्क सैकड़ों जरूरतमंदों तक पहुंचाए।
कोर्ट रोड निवासी कारोबारी संजय प्रजापति ने लॉकडाउन में सैनिटाइजर की कमी और बढ़ती कीमतें देखते हुए जरूरतमंदों की मदद करने का निर्णय लिया। उन्होंने बागपत में ही नहीं आसपास के जिलों में भी लोगों को निशुल्क सैनिटाइजर का वितरण किया।
देशराज मोहल्ला निवासी समाजसेवी भारत गौरव ने भी सैनिटाइजर की कमी देखते हुए प्रशासन से अनुमति ली। इसके बाद बाइक पर ही वह सैनिटाइजर वितरित करने निकल पड़े।
मुन्नालाल एनक्लेव निवासी अधिवक्ता विवेक तंवर भी लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों की मदद को आगे आए। उन्होंने अपने घर पर ही खाना तैयार कराया। इसके बाद जरूरतमंदों तक पहुंचे और उन्हें खाना व मास्क आदि वितरित किए।