‘छाड़ा बान माझ उर लागा, मरती बार कपटु सब त्यागा...’
खेकड़ा (बागपत)। ‘सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा सर संधान कीन्ह करि दापा, छाड़ा बान माझ उर लागा, मरती बार कपटु सब त्यागा...।’ श्रीराम के प्रताप का स्मरण करके लक्ष्मण ने वीरोचित दर्प करके बाण का संधान किया। बाण मेघनाद की छाती में लगा। मरते समय उसने सब कपट त्याग दिया। रामलीलाओं में लक्ष्मण मेघनाद वध सहित अन्य लीलाओं का मंचन किया गया। युद्ध के दृश्यों को देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे। शहर में श्री बालाजी रामलीला कमेटी की ओर से ग्यारहवे दिन की रामलीला का शुभारंभ मुख्य अतिथि बिमला देवी ने भगवाम श्रीराम और लक्ष्मण की आरती करके किया। मंचन में लंका के राजा रावण को जब यह पता चलता है कि लक्ष्मण की मूर्च्छा टूट चुकी है तो लंकेश अपने भाई कुंभकरण को जगाता है। जब कुंभकर्ण जाग जाता है तो रावण के आदेशानुसार कुंभकरण भगवान श्रीराम जी से युद्ध करने जाता है। रणभूमि में विभीषण कुंभकरण को समझाता है, लेकिन कुंभकरण नहीं मानता है। युद्ध में कुंभकरण का वध श्री रामजी के हाथों हो जाता है। रावण को जब इस बात का पता चलता है तो वह तिलमिला जाता है। इसके बाद रावण मेघनाद को युद्ध के लिये भेजता है। और उधर लक्ष्मण मेघनाद से बदला लेने के लिये श्रीराम की आज्ञा लेकर युद्ध के लिए जाता है। दोनों के बीच भयंकर युद्ध होता है। लक्ष्मण मेघनाद का सर काटकर उसका वध कर देते हैं। उधर मेघनाद की पत्नी सुलोचना को जब पता चलता है कि उनका पति मारा गया है। तो वह श्रीराम जी से अपने पति के शीश को लेने के लिये आग्रह करती है। श्रीराम जी मेघनाद का शीश उनकी पत्नी को सौप देते हैं। रावण अपने पुत्र की मौत पर व्याकुल हो जाता है। वह पातालपुरी के राजा अहिरावण के पास मदद के लिए भेजता है।
इस दौरान संजीव जैन, प्रवीण यादव, गोविंद माहेश्वरी, श्री बालाजी रामलीला कमेटी प्रधान नितिन जैन डायरेक्टर राजेश शर्मा, उप प्रधान नरेंद्र शर्मा, कोषाध्यक्ष संजीव जैन, सचिव प्रवीण यादव, संस्थापक राजेन्द्र यादव, संरक्षक आनंद यादव, धर्मवीर यादव, अजय शर्मा, मनोज जैन, मोहन बेदी, मनोज मोगा, राजा खान, सुनील रुहेला, दीपक कुमार, अतुल रुहेला, विमल कुमार, अमित कुमार, गोविंद, दीपक, अजय, ललित, डा मनोज धामा, आकाश जैन, मोहित जैन, गौरव वर्मा, सोनू वर्मा, अरूण जैन, गौरव तंवर आदि मौजूद रहे। उधर गांधी प्याऊ पर चल रही श्री धार्मिक रामलीला मे राम का दूत बनकर गये अंगद और रावण के बीच तीखे संवाद होते हैं। अंगद युद्ध का एलान करके श्री राम दल मे वापस लौट आते है। इसके बाद मेघनाद और लक्ष्मण के बीच युद्ध होता है। इसके बाद आगे की लीला का मंचन होता है। इस दौरान डायरेक्टर उमेश शर्मा, प्रधान अरविंद शर्मा, मुकेश शर्मा, नरेश शर्मा, पुष्पेंद्र कुमार, जतिन पांचाल, दीपक शर्मा, पीयूष शर्मा, डॉ. कपिल गौड़, प्रवेश शर्मा, पुनीत शर्मा, श्रद्वानंद पांचाल, राजू पांचाल, अरूण धामा, धीरू भैया, सौरभ जैन, ईलू जैन, तष्ण गुप्ता, नवाब धामा, राजा शर्मा, मुुकेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
बिनौली में तितरोदा गांव की धर्मशाला में अनमोल रामलीला पार्टी की ओर से मंचन में श्रीराम सेना के लंका पहुंचने, लक्ष्मण मूर्छा, मेघनाद वध सहित अन्य लीलाओं का मंचन किया गया। बाद में रावण को अग्नि बाण मारकर श्रीराम ने विजय प्राप्त की। इस दृश्य पर श्रीराम के जयकारे गूंजने लगे। रामलीला में कॉमेडी कलाकार विनेश कुमार कल्लू, पिंटू पंडित ने कॉमेडी प्रोग्राम की प्रस्तुती से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। रामलीला में महेश शास्त्री, विनोद प्रधान, डॉ विनय पांडेय, नीटू मुखिया, अश्वनी प्रताप सिंह, बिजेंद्र मुखिया, रामकुमार, नितिन कुमार, मोहित, आशू पांडेय आदि का सहयोग रहा।
बिनौली गांव के श्री प्रेम मंडल रामलीला कमेटी के तत्वाधान में प्रौजेक्टर पर चल रही रामायण में लक्ष्मण मूर्छित, कुम्भकर्ण वध, मेघनाथ वध, सलोचना सती,अही रावण वध ओर राम के द्वारा रावण वध का प्रसारण दिखाया गया। संरक्षक राहुल धामा, अध्यक्ष गुलबीर धामा, वरुण धामा, विवेक धामा, श्रीपाल धामा, परमबीर धामा, महेशपाल, अनिल धामा, देवेंद्र धामा, विनय धामा, प्रताप, तेजपाल आदि का सहयोग रहा।