बागपत। बच्चों में कुपोषण बढ़ता जा रहा है, जिससे जिला अस्पताल का वार्ड फुल हो गया है। अस्पताल के दस बेड के वार्ड में 20 बच्चे भर्ती हैं। जिससे एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है। मरीज अधिक आने के कारण वार्ड में बेड बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के भोजन के प्रति लापरवाही और जागरुकता की कमी से बच्चे कुपोषित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को कुपोषण के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है, इसके बावजूद लोग जागरुक नहीं हो रहे हैं। जिले में मिलने वाले अधिकांश कुपोषित बच्चे खांसी-जुकाम, निमोनिया और डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल की एनआरसी में दस बेड का वार्ड बनाया गया है। वार्ड में मरीज बढ़ रहे हैं। वार्ड में फिलहाल 20 बच्चे भर्ती हैं। बेड कम होने के कारण एक-एक बेड पर दो बच्चों को इलाज किया जा रहा है। बच्चों की संख्या बढ़ने के कारण अस्पताल के वार्ड में बेड बढ़ाने की तैयारी चल रही है।
- कुपोषण के कारण निमोनिया और डायरिया हो रहा
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सत्यप्रकाश का कहना है कि बार-बार निमाेनिया और डायरिया होना, हृदय कमजोर होना, ब्रेन का सही विकास न होना, संक्रमण, पीलिया के कारण बच्चे कुपोषित हो जाते हैं। इसके अलावा जागरुकता की कमी के कारण भी कुपोषण बढ़ता है। उनका कहना है कि बच्चे के छह महीने का होने पर दूध के अलावा अन्य खाद्य पदार्थ का सेवन करना चाहिए। जागरुकता के अभाव में माता-पिता बच्चों को छह महीने के बाद भी दूध ही पिलाते रहते हैं, जिससे बच्चे का पूरा विकास नहीं हो पाता है। उनका कहना है कि अस्पताल में भर्ती होने वाले अधिकतर बच्चे निमोनिया और डायरिया के मरीज हैं।
- कुपोषण के लक्षण
- जन्म के समय बच्चे का वजन कम होना
- बच्चे में चिड़चिड़ापन और सुस्ती रहना
- बार-बार बीमारियों की चपेट में आना
- बच्चे में उम्र के साथ वजन न बढ़ना
- बच्चे का खाना न पचना
- वर्जन- एनआरसी में कुपोषित बच्चे बढ़ गए हैं। बेड कम होने के कारण एक बेड पर दो-दो बच्चों को भर्ती कर इलाज कराया जा रहा है। वार्ड में बेड बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। - डॉ एसके चौधरी, सीएमएस