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मलेरिया का कहर

Thu, 17 Sep 2015 01:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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बागपत जिले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की निष्क्रियता का खामियाजा है कि संक्रामक बीमारियों ने पांव पसार लिया है। जिले को मलेरिया ने पूरी तरह से जकड़ लिया है। जिले में 15 दिन के अंदर करीब दस लोगों की बुखार से मौत हो चुकी है। हालात यह है कि सरकारी और निजी अस्पताल मरीजों से भरे हुए है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। निजी चिकित्सक घर पर ही मरीजों का उपचार कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डेंगू से इंकार कर रहे है।
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पिछले दो सप्ताह से बुखार का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1000-1200 मरीज उपचार करने के लिए आते हैं। इनमें से 40-45 प्रतिशत बुखार से ग्रस्त है। सीएचसी, पीएचसी में मरीजों की भीड़ लगी हुई है। आलम यह है कि मरीजों को उपचार करने के लिए कई-कई घंटे इंतजार करना पड़ता है।

निजी अस्पताल भी फूल चल रहे हैं। निजी चिकित्सक घरों पर जाकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। डौला गांव में सैकड़ों लोग बुखार से पीड़ित है। अग्रवाल मंडी टटीरी कस्बा की बच्ची, टांडा गांव के सतपाल की पांच वर्षीय बेटी आरती, बोढ़ा गांव के 62 वर्षीय चंद्रभान, पुराना कस्बा के दो वर्षीय आसमीन, बागपत एडीएम के पेशकार राजीव की पत्नी नम्रता देवी, खट्टा प्रहृलादपुर गांव के निशांत, सरूरपुर गांव के शहजाद की बुखार से मौत हो चुकी है।
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सीएमओ डॉक्टर रविंद्र कुमार मिश्रा का कहना है कि जिले में मलेरिया और टायफाइड बुखार की चपेट में लोग आ रहे हैं। डेंगू का कोई केस नहीं मिला है। मरीजों का उपचार किया जा रहा है। अस्पतालों में दवाई की कोई कमी नहीं है, जहां पर बुखार के मरीज ज्यादा है उन क्षेत्रों में फॉगिंग कराई जा रही है।

डौला में बुखार से युवक की हालत बिगड़ी
पिलाना। डौला गांव के युवक शहजाद की बुधवार को हालत बिगड़ गई। निजि चिकित्सक ने युवक के सिर में बुखार टकराने की बात कहकर उसे रेफर कर दिया है। लोगों ने हंगामा करते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकरियों से गांव में हैल्थ कैंप लगवाने और कीटनाशक दवाई का छिड़काव कराने की मांग की है।

बुखार से तीन दिन में चार मौतें 
छपरौली क्षेत्र के बौढ़ा गांव में पिछले तीन दिनों में बुखार की चपेट में आकर तीन महिलाओं सहित चार लोगों की मौत हो गई। जानलेवा बुखार के कारण क्षेत्र में दहशत पसर गई है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से गांव में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।

बौढ़ा गांव के 45 वर्षीय महेंद्र पुत्र रामभजन बुखार की चपेट में आकर कई दिनों से जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे। उसे परिजन उपचार के लिए रोहतक (हरियाणा) ले गए थे, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। 70 वर्षीय बलदेई पत्नी रामचंद्र व 65 वर्षीय भरपाई पत्नी रामचन्द्र  की बुधवार को बुखार की चपेट में आकर मौत हो गई।

इससे पहले सोमवार को अकतरी पत्नी सत्तार की भी बुखार के चलते मौत हो गई थी। इनमें से महेंद्र, बलदेई व भरपाई का अंतिम संस्कार बुधवार को ही किया गया। संक्रामक बुखार फैलने से गांव में दहशत का आलम है। ग्रामीण विकास शर्मा, कुलदीप शर्मा, ओम सिंह, बिजेंद्र, नरेंद्र व कृष्णदत्त आदि ने प्रशासन से गांव में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए जाने की मांग की है, जिससे पीड़ित ग्रामीणों को राहत मिल सके। इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी रविंद्र कुमार मिश्र ने बताया कि गांव में हेल्थ कैंप लगाकर आवश्यक  चिकित्सा सुविधा यथाशीघ्र उपलब्ध कराई जा रही है। बुखार के प्रकोप के चलते तीन दिन के लिए लगातार कैंप लगाया जाएगा ।
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