फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मंदिर में कराया भगवान शालिगराम व तुलसी विवाह

विज्ञापन
विज्ञापन
मंदिर में कराया भगवान शालिगराम और तुलसी विवाह
विज्ञापन

बागपत। नगर के ठाकुरद्वारा मंदिर में बुधवार को देवोत्थान एकादशी पर विधि विधान के साथ भगवान शालिगराम और तुलसी का विवाह कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें नगर के श्रद्धालु कोविड के नियमों का पालन कर शामिल हुए।
मंदिर के पुजारी कृष्णानंद शास्त्री ने बताया कि एकादशी से हिंदू धर्म में शुभ कार्य जैसे विवाह का शुभारंभ होता है। देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु के स्वरूप शालिगराम का देवी तुलसी से विवाह होने की परंपरा है। देवोत्थान एकादशी के दिन तुलसी विवाह का अनुष्ठान करता है, उसे कन्यादान के बराबर पुण्य मिलता है। वर्ष में 24 एकादशी व्रत करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। तुलसी विवाह के लिए तुलसी का पौधा एक चौकी पर आंगन के बीच में रखकर तुलसी के सामने मेहंदी, मौली धागा, फूल, चंदन, सिंदूर, सुहाग का सामान, चावल और मिठाई, पूजन सामग्री के रूप में रखी जाती हैं। बुधवार को मंदिर में तुलसी विवाह कार्यक्रम किया। मंदिर में शालिनी गुप्ता, मंजू गुप्ता, सीमा गुप्ता, राधा द्विवेदी, संगीता गुप्ता, स्वाति गुप्ता, कन्हैया गुप्ता, श्री चंद गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, आनंद गुप्ता ने विधि - विधान से कराया।
विज्ञापन
विज्ञापन

एकादशी पर चर्तुमास की निद्रा से जागते हैं भगवान विष्णु
बागपत। नगर के जानकी दास मंदिर के पुजारी ज्योतिषाचार्य पंडित राज कुमार शास्त्री ने बताया कि भगवान विष्णु आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को निद्रा में जाने के बाद कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को चर्तुमास की की निद्रा से जागते हैं। भगवान विष्णु के चतुर्मास की निद्रा से जागने पर ही इस एकादशी को देवोत्थान एकादशी कहा जाता है। देवोत्थान एकादशी पर भगवान शालिगराम और तुलसी के विवाह किया जाता है और इसी दिन से विवाह शुरू होते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें