ऐसे में अगर लोग जानबूझकर बसों की छत पर बैठकर सवारी करते हैं तो निश्चित रूप से प्रशासन की निष्क्रियता साफ झलक रही है। इतना ही नहीं सड़कों के किनारे बिजली के नंगे तार छत पर बैठे लोगों को अपनी चपेट में लेने के लिए सदैव खतरे का संकेत देते रहते हैं। जिससे छत पर बैठे लोगों के गिरने का डर भी बना रहता है।
यात्रियों में मनोज कुमार, अनिल, पंकज कुमार, अखिलेश सहित कई लोगों ने बताया कि यह एक दुर्भाग्य है कि लोग बस की छत पर बैठकर खतरों के साथ यात्रा करते हैं। रोडवेज प्रशासन को भी इस ओर पहल करने की जरूरत है।
जितनी सवारी अन्दर उतनी ऊपर
इन बस में हालत यह है कि जितनी सवारी बस के अन्दर बैठी होती है लगभग उतनी ही सवारी वह बस के ऊपर बैठा कर चलते हैंं। इस प्रकार बस मालिकों की दोहरी कमाई हो रही है। उन्हें इस बात की बिल्कुल चिंता नहीं है कि अगर अधिक वजन से बस असंतुलित होकर पलट जाती है तो कितने लोगों की जिंदगियां एक झटके में समाप्त हो जाएंगी।