बागपत। बेटा-बेटी की हत्या करने वाली मां को न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। उसने घरेलू कलह में दोनों की गला दबाकर हत्या की थी और वह रातभर दोनों के शव के पास बैठी रही थी।
डीजीसी सुनील पंवार के अनुसार छपरौली थाने में एक अप्रैल 2021 को छपरौली कस्बे के मोहल्ला कुरेशियान के हसीन ने हत्या का एक मुकदमा दर्ज कराया था। उसका छोटा भाई गुलाब कुरैशी अपनी पत्नी अंजुम, दो बच्चे उमेर (8) व अलसिफा (4) के साथ मोहल्ला कुरेशियान में ही रहता था। उसका भाई गुलाब फेरी लगाकर कपड़ा बेचने का काम करता है, जो 31 मार्च 2021 को कपड़ा बेचने के लिए छोटे भाई बिलाल के पास फरीदाबाद गया था। उसके भतीजे रिजवान ने उसे बताया कि गुलाब का घर का दरवाजा अंदर से बंद है और दूध वाले के दरवाजे खटखटाने के बाद भी नहीं खोला गया।
वह अपने अन्य कई पड़ोसियों के साथ वहां पहुंचा और दरवाजे को तोड़ दिया। वहां देखा कि गुलाब की पत्नी अंजुम नीचे बैठी थी और उमेर, अलसिफा के शव बेड़ पर पड़े थे। दोनों की हत्या अंजुम ने घरेलू कलह में गला दबाकर की थी। इस मामले में पुलिस ने अंजुम को कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया था और उसके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
इस मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार की कोर्ट में चल रही थी। डीजीसी सुनील पंवार के अनुसार इस मामले में न्यायालय ने अंजुम को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है और अर्थदंड जमा नहीं करने पर तीन वर्ष की सजा बढ़ाई जाएगी।
खुद को निर्दोष साबित नहीं कर सकी अंजुम
डीजीसी सुनील पंवार के अनुसार इस मामले में सात गवाह पेश किए गए और वह मुकर गए। इसके बावजूद अभियोजन पक्ष परिस्थिति के अनुसार साक्ष्यों के आधार पर यह सिद्ध करने में सफल रहा कि दोनों बच्चों की अंजुम ने हत्या की है। क्योंकि वहां परिस्थितियों के अनुसार अन्य कोई व्यक्ति नहीं आ सकता था और अंजुम भी ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दे सकी, जिससे यह साबित हो सके कि उसने हत्या नहीं की।