निरपुड़ा गांव के जंगल में तेंदुए ने नील गाय का शिकार किया। किसानों ने लाठी-डंडों और आग जलाकर तेंदुए के चंगुल से नील गाय को छुड़ाया, लेकिन तब तक नील की मौत हो चुकी थी। इसे देखकर किसानों में दहशत फैल गई है। उन्होंने वन विभाग को इसकी सूचना दी, लेकिन वन विभाग की टीम देर रात तक गांव में नहीं पहुंची है। इससे किसानों में वन विभाग के प्रति आक्रोश पनप रहा है।
रविवार की शाम निरपुड़ा गांव निवासी किसान नरेश पुत्र महेंद्र अपने खेत में घूमने गया था। इसी दौरान उसने वहां पर तेंदुए को नील गाय का शिकार करते देखा। उसने इसकी सूचना मोबाइल पर ग्रामीणों को दी। सूचना मिलते ही काफी संख्या में ग्रामीण बाइकों पर सवार होकर खेत में पहुंचे तो उनके होश उड़ गए। तेंदुए ने नील गाय दबा रखी थी और उसके गले पर अपने दांत गड़ा रखे थे।
किसानों ने आग जलाकर और लाठी-डंडों से तेंदुए को डराकर नील गाय को छुड़ाया, लेकिन तब तक नील गाय की मौत हो चुकी थी। ग्रामीणों ने तेंदुए को दूर तक खदेड़ा। उन्होंने इसकी सूचना वन विभाग को दी, लेकिन वन विभाग की टीम देर रात तक भी गांव नहीं पहुंची। इससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।
ग्राम प्रधान मुनेश देवी के पुत्र निश्चय राणा ने बताया काफी दिनों से तेंदुआ गांव के जंगल में घूम रहा है। वन विभाग की टीम को लगातार सूचना दी जा रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। तेंदुआ कभी गांव में घुस जाता है तो कभी खेतों में किसानों के पीछे दौड़ता है। तेंदुए के भय से किसानों ने खेतों में भी जाना बंद कर दिया है।
इससे ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ आक्रोश पनप रहा है और कभी भी आक्रोश सड़कों पर फूट सकता है। ग्रामीणों ने कहा जब तक वन विभाग की टीम गांव में आकर नील गाय शव को नहीं देखती, तब तक उसने दफनाया नहीं जाएगा। फिलहाल ग्रामीण नील गाय के शव को गांव में लेकर आ गए हैं। उधर, वन विभाग के अधिकारी ओम सिंह ने बताया सोमवार को निरपुड़ा गांव में तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगा दिया जाएगा।
तेंदुए के गुर्राने से किसान दहशत में
बालैनी (ब्यूरो)। हरिया खेड़ा गांव के जंगल में किसानों को खेतों में तेंदुए के पंजों के निशान दिखाई मिले। किसान रामबीर को तेंदुआ की आवाज सुनाई दी। उसने दौड़कर नलकूप में घुसकर जान बचाई । ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी।
किसान रामबीर पुत्र झंडा निवासी हरिया खेड़ा रविवार को अपने खेत में गन्ने की सिंचाई करने के लिए गया। जब वह खेत के पास पहुंचा तो उसे कुछ अलग तरह की आवाज सुनाई दी। आवाज को सुनकर वह तुरंत नलकूप में घुस गया। इसकी जानकारी उसने गांव के लोगों को दी। ग्रामीण हथियारों के साथ रामबीर के खेत के पास पहुंचे।
लोगों ने जांच पड़ताल की तो कई खेतों में उन्हें तेंदुए के पंजों के निशान मिले। किसान ने बताया ईख के खेत में जो आवाज आई थी वह तेंदुए की थी। वन विभाग के प्रति ग्रामीणों में रोष व्याप्त हो गया। उन्होंने बताया सूचना देने के बाद भी वन विभाग का कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा।
झूंडपुर गांव में घुसा तेंदुआ
दोघट। झूंडपुर गांव में बाहरी छोर पर बिंदर पुत्र अजब सिंह का मकान और घेर है। शनिवार की शाम खेतों से निकल कर तेंदुआ उनके घेर में आकर छिप गया। तेंदुए को बिंदर ने देख लिया और शोर मचा दिया। शोर सुनकर काफी संख्या में ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर वहां पहुंचे और तेंदुए को खदेड़कर भगा दिया। ग्रामीणों ने कहा तेंदुए गांव में शिकार करने आया था।
यदि वह किसी को दिखाई नहीं देता तो बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने गांव में ऐलान करा दिया कि शाम होते ही सब अपने मकानों के दरवाजे बंद कर लें और बच्चों को घर से बाहर न निकलने दें। गांव में तेंदुए फिर आ सकता है। ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने की मांग की।