बिनौली। संतनगर की लक्ष्मी ने पति रणधीर सिंह की हत्या के बाद खुद हिम्मत ही नहीं दिखाई, बल्कि उस हिम्मत के सहारे बेटियों मेघना व नीलम को भी कामयाब बना दिया। लक्ष्मी ने खूब मेहनत करके दोनों बेटियों को पहले राष्ट्रीय स्तर का पहलवान बनाया। बेटी मेघना और नीलम ने भी वर्दी पहनकर मां के सपनों को साकार करके दिखाया।
मूलरूप से सिरसली की रहने वाली लक्ष्मी देवी के पति रणधीर सिंह की वर्ष 1993 में हत्या हो गई थी। बेटे और चार बेटियों की शादी करने के बाद छोटी बेटी मेघना और नीलम की परवरिश करने में लक्ष्मी ने तमाम परेशानियों का सामना किया।
वह बरनावा के पास संतनगर गांव में आकर बस गई। यहां गरीबी से लड़ते हुए मजदूरी की, कर्ज लेकर आटा चक्की लगाई और दिन रात गांव वालों के गेहूं की पिसाई करके दोनों बेटियों को पढ़ाया। पढ़ाई के साथ ही मेघना व नीलम को दाहा के अखाड़े में कुश्ती के गुर सीखने भेजना शुरू किया।
उनके पहनावे और गतिविधियों को लेकर गांव वालों ने ताने देने शुरू कर दिए। मगर लक्ष्मी ने साफ कह दिया कि वह अपनी बेटियों को पहलवान बनाएगी। इसको लेकर गांव वाले भी उनसे नाराज हो गए।
जब दोनों बेटियों ने कुश्ती में पदक जीतने शुरू किए तो गांव वाले भी उनपर फक्र करने लगे। बेटियों ने मेहनत कर कुश्ती के अखाड़े में ऐसे दांव पेंच चलाए कि राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर दर्जनों पदक जीत लिए। खेल के दम पर नीलम तोमर ने यूपी पुलिस और मेघना तोमर ने सीआरपीएफ में भर्ती होकर अपनी मां लक्ष्मी के सपनों को साकार किया। (संवाद)