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उत्तम ब्रह्मचर्य व्रत जानो, माता बहन सुता पहचानो

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बड़ौत के श्री 1008 पार्श्वनाथ मन्दिर नेहरू रोड में दशलक्षणधर्म पर्व के अंतिम दिन पूजा करते जैन श्रद - फोटो : BARAUT
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बड़ौत। श्री 1008 अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर मंडी में दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन रविवार को अनंत चतुर्दशी महापर्व धूमधाम से मनाया गया। मंदिरों में जैन श्रद्धालुओं ने थालियां चढ़ाई। वासुपूज्य भगवान के निर्वाण महोत्सव पर भगवान को निर्वाण लाडू समर्पित किया। विधानाचार्य पंडित चंद्रप्रकाश ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का महत्व समझाया। कहा कि ‘उत्तम ब्रह्मचर्य व्रत जानो, माता बहन सुता पहचानो’ अर्थात व्यक्ति को उत्तम ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए।
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शांति धारा का सौभाग्य सोधर्म इंद्र विपिन जैन को प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से पूजन अर्चना की। नित्य नियम पूजन में देव शास्त्र गुरु पूजन, अजितनाथ भगवान पूजन, दशलक्षण पूजन, सोलहकारण पूजन, रत्नत्रय पूजन, नंदीश्वर दीप और वासुपूज्य भगवान की पूजा की गई। संगीतकार अनुपमा जैन ग्वालियर ने भजन ‘थाली सजा के रखना दीपक जला के रखना’ को श्रद्धालुओं ने विशेष रूप से पसंद किया। श्री दशलक्षण विधान में सोधर्म इंद्र विपिन जैन ने दस धर्मों की अष्ट द्रव्यों से पूजा की। मंडल पर श्रीफल समर्पित किए। विधान में मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, अमित जैन, अशोक जैन, राकेश जैन, पंकज जैन, अनिल जैन, इंद्राणी जैन, त्रिशला जैन, रश्मि जैन, डिंपल जैन, सरला जैन आदि उपस्थित रहे। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि शाम को सात बजे मंदिर में आरती हुई और बच्चों की थाली सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। 20 सितंबर को अजितनाथ भगवान का अभिषेक यात्रा महोत्सव मनाया जाएगा।
वतन से मोहब्बत में जवानी दे गए ...
बड़ौत। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन श्री 1008 पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू रोड में तेरह द्वीप महामंडल विधान पंडित नेमचंद जैन के दिशा निर्देशन में संपन्न हुआ। सर्वप्रथम श्रीजी का प्रक्षालन अभिषेक व सौधर्म इंद्र सतेंद्र जैन, कुबेर इंद्र अमित जैन, यज्ञ नायक ऋषभ जैन, महेंद्र इंद्र अतिशय जैन व अमित जैन, ऋषभ जैन ने शांतिधारा की। आठवें नंदीश्वर द्वीप, रुचिकर द्वीप व कुंडल द्वीप की पूजा की गई। 40 अर्घ्य समर्पित किए गए। इस अवसर पर पंडित नेमचंद ने कहा कि ब्रह्मचर्य का पालन करने से करने से शरीर निरोग रहता है। बुद्धि और ज्ञान बढ़ता है। मीडिया प्रभारी आदिश जैन ने बताया कि सायंकाल मंदिर में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि हिमांशु अलंकार ने ‘हिंसा और पाप से जो कोसो-कोसो दूर रहे, ऐसे धर्मों में जैन धर्म एक नाम है, जियो ओर जीने का नारा जो लगा रहे वो धर्म आज दुनिया में सबसे महान है’ सुनाया। अमन जैन ने वीर सैनिकों को सलामी देते हुए कहा कि ‘वतन से मोहब्बत में जवानी दे गए, जो याद रहे दुनिया को वो कहानी दे गए’। संचालन कवि हिमांशु अलंकार ने किया। भगवान पार्श्वनाथ की आरती के साथ कवि सम्मेलन का समापन हुआ। कार्यक्रम में सतेंद्र, अनिल, नरेश, राजीव, अमित, ऋषभ, आदिश, मुकेश जैन, सुमत, संजीव, सुधीर शामिल रहे। इस दौरान अनंत चतुर्दशी व वासु पूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक महती धर्म प्रभावना के साथ मनाया गया। मोक्षकल्याण का लड्डू चढ़ाया गया।
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