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दादा-पिता की कर्मभूमि छपरौली से चुनावी मैदान में उतर सकते है जयंत

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- रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी पर छपरौली से विधानसभा चुनाव लड़ने का दबाव बना रहे वरिष्ठ नेता
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- जयंत चौधरी के छपरौली से चुनाव लड़ने पर आसपास की कई सीटों का बदल सकता है गणित
- भाजपा की सर्वे रिपोर्ट भी हाईकमान तक पहुंची, दो सीटों की सकारात्मक तो एक की नकारात्मक रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की कर्मभूमि छपरौली से रालोद सुप्रीम जयंत चौधरी चुनावी मैदान में उतर सकते है। अगर ऐसा होता है तो चौधरी परिवार की विरासत कही जाने वाली छपरौली सीट से तीसरी पीढ़ी चुनावी मैदान में होगी। यहां से चुनाव लड़ने के लिए जयंत चौधरी पर वरिष्ठ नेता दबाव बना रहे है। अगर ऐसा हुआ तो आसपास की कई सीटों का गणित बदल सकता है। उधर, भाजपा की सर्वे रिपोर्ट भी हाईकमान को पहुंच गई है। इसमें दो सीटों की सकारात्मक तो एक सीट की नकारात्मक रिपोर्ट है।
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक शुरूआत छपरौली से ही हुई थी। वे यहां से पहली बार वर्ष 1937 में चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। उनके बाद बेटी सरोज वर्मा वर्ष 1985 और वर्ष 1991 में उनके बेटे स्वर्गीय चौधरी अजित सिंह भी छपरौली से जीतकर विधानसभा गए थे। छपरौली की विरासत को पिछले महीने ही खाप चौधरियों ने पिता अजित सिंह के निधन के बाद रालोद अध्यक्ष बने जयंत चौधरी को सौंपा है। अब वह परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए छपरौली से चुनावी मैदान में उतर सकते है। इसका एक बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है कि अगर जयंत चौधरी खुद चुनावी मैदान में उतरते है तो उससे बागपत, बड़ौत समेत आसपास की कई अन्य सीटें प्रभावित हो सकती है। रालोद जिलाध्यक्ष डा. जगपाल तेवतिया का कहना है कि इस पर अभी निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन जयंत चौधरी के सामने पार्टी के वरिष्ठ नेता यह बात रख रहे है। उन पर छपरौली से चुनाव लड़ने का दबाव बनाया जा रहा है।
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भाजपा की सर्वे रिपोर्ट से उड़ी दावेदारों की नींद
भाजपा ने प्रत्याशी तय करने के लिए सर्वे कराया है। जिलाध्यक्ष सूरजपाल गुर्जर का कहना है कि जिले की दो सीटों की रिपोर्ट सकारात्मक है तो एक की नकारात्मक है। यह रिपोर्ट हाईकमान तक पहुंच चुकी है। इसके साथ ही पार्टी इस बार जिले की स्थिति को देखते हुए टिकट बंटवारे में सभी वर्ग को शामिल करना चाहती है। समीकरणों को देखते हुए एक सीट से किसी अन्य वर्ग का प्रत्याशी भी उतारा जा सकता है।
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