आम बजट पर गरीब, किसान, आम आदमी, व्यापारी से लेकर हर वर्ग के लोगों की नजर लगी हुई थी। हालांकि बजट का पिटारा खुला तो सभी के मुंह से सिर्फ यही निकला कि महंगाई और खाएगी। कहना था कि जेटली की पोटली से महंगाई निकली हैं। सर्विस टैक्स ने प्रयोग की हर चीज को महंगा कर दिया है। किसानों और गरीबों को जरूर बजट से आकर्षित करने का प्रयास किया गया है।
बोले किसान, पूरा बजट चुनावी
किसान समय सिंह कहते हैं कि किसानों की आय दोगुनी करने की बात बजट में कही है, लेकिन साधन तो कुछ दिए नहीं, आय कहां से दोगुनी होगी। किसान ओमवीर सिंह कहते हैं कि बजट को पूरी तरह से चुनावी बना दिया है। सिंचाई के लिए, लोन के लिए बजट रखा गया है। लेकिन जो बजट तैयार किया है 2022 तक के लिए है। अभी तो किसान को कोई राहत मिलने से रही। किसान मनीष कहते हैं कि गन्ने के लिए तो बजट में कुछ नहीं रखा। यहां तो किसान गन्ने का पेमेंट न मिलने से ही परेशान हैं। ऐसे बजट का क्या फायदा तो कई साल बाद किसानों को लाभ दे।
व्यापार खत्म हो ही जाएगा
व्यापारी नेता नंद लाल डोगरा कहते हैं कि टैक्स में कोई राहत नहीं है। बाजार तो पहले से ही ठप पड़ा है। अब और भी ठंडा हो जाएगा। व्यापारी हरपाल कहते हैं कि हाईवे के लिए बजट रखा गया है, लेकिन कहां के लिए है, कब तक आएगा, यह पता नहीं। तब तक तो यहां का व्यापार ही खत्म हो जाएगा। व्यापारी तो पहले ही संसाधनों के अभाव में शहर छोड़ रहे हैं।व्यापारी दीपक कहते हैं कि सर्विस टैक्स बढ़ाकर तो महंगाई को और बढ़ा दिया है। आम जरूरत की चीजें तो महंगी हो ही जाएंगी।
गृहणियों का रसोई बजट महंगा
गृहणी कविता कहतीं हैं कि बजट को लेकर उम्मीद तो काफी लगी हुईं थीं, लेकिन हुआ सब उल्टा, कास्मेटिक तक का सामान महंगा कर दिया। मोबाइल सेट सस्ते करने से क्या फायदा जब उसका बिल ही महंगा हो जाएगा। जेब तो बिल ही काटेगा। नीलम कहतीं हैं कि बजट में महंगाई को कम करने का प्रयास करना चाहिए था, जिससे आम गृहिणी की रसेाई आराम से चल सके। लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया। दालों के रेट कम करने की बात कही बेशक गई हो, लेकिन समाधान नहीं किया गया। अब तो बाहर होटल पर जाकर खाने में भी जेब कटेगी। डाक्टर शालिनी कहतीं हैं कि सर्विस टैक्स बढ़ जाने से बिलिंग के हर सामान के रेट बढ़ गए हैं। जो मध्यम वर्ग की जेब को ही काटेंगे। सोने से लेकर कास्मेटिक का सामान तक महंगा हो गया है।