एक कोल्हू संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सामान्य तौर पर कोल्हू में गुड़ बनाने के लिए गन्ने की पेराई करके रस निकला जाता है और उसे एक बड़े कढ़ाहे में पकाया जाता है।
पहले गुड़ की सफाई के लिए भिंडी के पौधे, सकराई आदि जड़ी बूटियां प्रयोग होती थी। उसके बाद जब जड़ी बूटियां समाप्त हो गईं तो खाने का मीठा सोडा या हाइड्रो पाउडर डालकर सफाई की जाती रही, ताकि गुड़ का रंग निखर जाए।
बड़का गांव में गुड़ को चमकीला व केसरिया रंग देने के लिए हाइड्रो कैमिकल (सेफोलाइट) जैसे खतरनाक कैमिकल का प्रयोग किया जा रहा है। जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होता है। क्षेत्रवासियों में मनु, कपिल, अक्षय, गोल्लू, राजीव, हिमांशु ने जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की।
शिकायत आई थी, इसको लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों व तहसीलदार को मौके पर भेजकर जांच कर कार्रवाई कराई जाएगी- सुभाष सिंह, एसडीएम बड़ौत।