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बुखार आते ही खुद को आइसोलेट करें, फिर कराएं जांच

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बचाव के तरीके बहुत आसान, संक्रमण मिला तो फिर बढ़ती जातीं मुश्किलें
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। कोरोना के संक्रमण का फैलाव हर घंटे बढ़ रहा है। संक्रमित होने के बाद फिर मुसीबतों का सिलसिला शुरू हो जाता है। आक्सीजन और बेड के लिए भागदौड़ होती है और रोग की जटिलताएं बढ़ती जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वक्त रहते बचाव कर लेने से संक्रमण हुआ भी तो जान का खतरा टल जाता है। इलाज से संक्रमण ठीक हो जाता है। चिकित्सीय क्षेत्र में सालों से काम कर रहे विशेषज्ञों से हमने बात की। विशेषज्ञों ने बहुत महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, इनसे इस मुसीबत के वक्त राहत मिल सकती है।
वैक्सीन से मिल रहा है प्रोटेक्शन
सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार का कहना है कि वैक्सीन से कोरोना के बचाव के लिए बहुत मजबूत प्रोटेक्शन मिल रहा है। संक्रमण वैक्सीन लगने के बाद भी हो सकता है, लेकिन यह जानलेवा नहीं हो पाएगा। बचाव के चार तरीकों पर अमल करें। इससे ही बचाव होगा। यही तरीके वही हैं जिन्हें पहले से बताया जा रहा है ।मास्क लगाएं, सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजेशन और साबुन से नियमित हाथ धोएं। साबुन से यह छूट जाएगा। इन्हें अपनाने पर सुरक्षा है।
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पहले खुद को आइसोलेट कर लें
वरिष्ठ चिकित्सक और पूर्व सीएचसी अधीक्षक डॉ. अजेंद्र मलिक ने बताया कि अगर किसी को बुुखार आता है तो वह सबसे पहला काम यह करें कि खुद को आइसोलेट कर लें। हर बुखार को कोरोना न समझे, लेकिन लापरवाही भी न करें। इसके बाद एंटीजन और आरटीपीसीआर जांच कराए। अगर पॉजीटिव आती है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे और इसके मशविरे में अमल शुरू कर दें। बचाव सबसे ज्यादा जरूरी है। कोशिश यह करें कि संक्रमित ही न हों। अगर हों तो पॉजीटीविटी बनाए रखें। यह सबसे अधिक जरूरी है।
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सांस फूले तो पेट के बल लेट जाएं
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मनीष तोमर ने बताया कि वैसे बचाव से अच्छा कोई विकल्प नहीं है, कोरोना संक्रमण को दूर रखने के लिए। यदि संक्रमित होते हैं तो घबराएं नहीं। गहरी गहरी सांसें लेते रहे और पेट के बल लेट जाएं। पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन सेच्युुरेशन की जांच करते रहें। अगर 92 के नीचे आने लगे तो समझेें ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत है। अस्पताल में भर्ती होने का इंतजाम करें। घबराएं नहीं, इससे भी सांस फूलने का लक्षण उभर आता है। इलाज के दौरान हौसला बनाए रखें। यही तरीका है।
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