बागपत। जिले में भूजल का स्तर प्रत्येक वर्ष 70 सेमी तक नीचे जा रहा है। अति दोहन के कारण प्रत्येक ब्लॉक डार्क जोन में हैं। आबादी क्षेत्र में सबमर्सिबल के चलन ने हालात मुश्किल कर दिए हैं। पानी की बर्बादी नहीं रोकी गई तो आने वाली पीढ़ियां बूंद-बूंद को मोहताज हो जाएगी।
उत्तर प्रदेश जल निगम के आंकड़े ही बताते हैं कि प्रत्येक साल साल औसत तौर पर 60 से 70 सेंटीमीटर भूजल स्तर नीचे जा रहा है। किसी क्षेत्र में यह ज्यादा भी है। अधिकतर क्षेत्रों में भूगर्भ जल 100 से 110 फीट तक पहुंच गया है। विभाग के तकनीकी सहायक श्यामवीर ने बताया कि खेकड़ा में वर्ष 2019 में जलस्तर करीब 30 मीटर पर रहा है। अब यहां जलस्तर करीब 110 फीट पर पहुंच गया है। इससे पहले यहां वर्ष 2014 के सापेक्ष वर्ष 2015 में प्री मानसून का जलस्तर देखें तों 1.17 मीटर जलस्तर गिरा है। हिंडन और कृष्णा नदी के बीच के चौगामा क्षेत्र में जलस्तर लगतार गिर रहा है। पुसार गंाव में जलस्तर 35 मीटर और निरपुड़ा में साल 2019 के रिकॉर्ड के मुताबिक 31 मीटर पर जलस्तर है।
इन क्षेत्रों में बढ़ रही दिक्कत
बागपत। जिले के सिरसली, पिलाना, सूप, दोघट, गांगनौली और बिजरौल ऐसे गांव हैं, जहां जलस्तर लगातार गिर रहा है। यहां भूल के अति दोहन से जिले के हालात बिगड़ रहे हैं।
हर व्यक्ति पानी बचाने के लिए आगे आएं : डीएम
बागपत। डीएम शकुंतला गौतम ने कहा कि प्रशासन ने जागरूकता अभियान शुरू किया है। प्रत्येक व्यक्ति को जिम्मेदारी समझनी होगी। भूजल स्तर को बचाया जाना जरूरी है।
अतिदोहन से खड़ी हो रही मुश्किल : राजेंद्र सिंह
बागपत। जलपुरुष के नाम से विख्यात मैग्सेसे अवार्ड विजेता राजेंद्र सिंह का कहना है कि जल के अति दोहन के कारण मुश्किल खड़ी होने लगी है। भविष्य में हालात और अधिक विकट होंगे। युवा समाज को जागरूक करने का कार्य करें।