बड़ौत। जांच के दौरान जिस घर के हैंडपंप का पानी सही नहीं पाया गया, तो जलनिगम द्वारा उस हैंडपंप पर लाल निशान लगाया जाएगा। ताकि कोई भी व्यक्ति उस हैंडपंप के पानी का इस्तेमाल पीने या खाना बनाने में न कर सके।
शहर से लेकर गांव तक पड़े पैमाने पर जल का दोहन हो रहा है। गांव में बहुत से घरों में तो आज भी देशी हैंडपंप का ही लोग पानी पी रहे है, इसके अलावा लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार द्वारा भी जगह-जगह इंडिया मार्का हैंडपंप लगाया गया है। वर्तमान समय में कई हैंडपंपों का पानी मानक के अनुसार नहीं है। पानी में पाए जाने वाले तत्व कहीं अधिक तो कही कम हैं। पानी में इनकी मात्रा अधिक या कम होना दोनों रूप में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
ग्रामीण इलाकों की अधिकतम आबादी आज भी पुराने जमाने के घरों में लगे देशी हैंडपंप का ही पानी पी रही है। गांवों में तो लोगों को यह भी मालूम नहीं कि पानी की शुद्धता की जांच होती है। उनको तो पीने का पानी सिर्फ साफ दिखना चाहिए। जिसके कारण वह अनेक बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
एक किट से होगी 60 से 100 हैंडपंपों की जांच
जेई माधव मुकुंद ने बताया कि एक किट से वह 60 से 100 हैंडपंप के पानी की जांच कर सकती हैं। ताकि लोग उस नल के पानी का खाना बनाने या पेयजल में प्रयोग न कर सकें।
पानी में तत्व निर्धारित मात्रा अधिकतम मात्रा
पीएच- 6.5- 8.5 --- 6.5-8.5
आयरन- 0.3 --- 1.0
क्लोराइड- 250 --- 1000
क्लोरिन- 0.2 --- 0.5
नाइट्रेड- 45 --- 100
फ्लोराइड- 1.0 --- 1.5
आर्सेनिक- - - 000 --- 0.005 पीपीएम
कोट...
- जल सखियों को प्रशिक्षण दिया था, लेकिन जिस कंपनी को जल सखियों को प्रशिक्षण देना है। उन्होंने अभी प्रशिक्षण नहीं दिया। बताया कि जांच के दौरान जिस हैंडपंप का पानी मानक के विपरीत पाया जाएगा। उस हैंडपंप पर लाल निशान लगा दिया जाएगा ताकि लोग उस हैंडपंप का पानी पीने या खाना बनाने में प्रयोग न कर सके, क्योंकि अशुद्ध जल के इस्तेमाल से शरीर में तमाम बीमारियां हो जाती हैं। - माधव मुकुंद, जेई, जलनिगम