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कर्ज पूरा माफ होता तो पार हो जाती नैया

Wed, 05 Apr 2017 01:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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मोबाइल पर कर्ज माफी के बारे में खबर सुनते किसान। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सूबे में भाजपा की सरकार बनते ही कर्ज माफी की बारिश का इंतजार कर रहे किसानों पर सीएम महंत आदित्य नाथ ने राहत के छींटे मारे। एक लाख तक कर्ज वाले किसानों को ऋण माफी दी। कर्ज माफी की घोषणा के बाद किसानों ने मिली जुली प्रतिक्रियाएं दी है। 
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देशखाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह ने कहा लघु और सीमांत किसानों को ही सही, कुछ तो राहत मिलेगा। बेहतर होता सरकार कोई दूसरा फार्मूला अपनाती। कर्ज माफी का दायरा सहकारी बैंकों तक रखा गया है, लेकिन अन्य बैंकों से भी लोग कर्ज लेते हैं।

खेकड़ा के मोहल्ला औरंगाबाद निवासी लघु किसान लोकेश धामा, रवि कुमार, देशपाल सिंह और ओमकार सिंह ने कहा सरकार का कर्ज माफी का जो तरीका रहा है वह वास्तविक गरीब किसानों तक पहुंचने वाला नहीं है। बैंकों से वही किसान कर्ज ले पाते हैं जो प्रभावशाली होते हैं। 
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रटौल गांव के किसान ललित सैनी ने कहा कर्ज माफी से किसानों को लाभ होगा। यह बेहद अच्छी पहल की गई है। चरण सिंह ने भी इसे सरकार का अच्छा कदम बताया। कूड़ी गांव के किसान राधेश्याम ने भी सरकार के कदम को सार्थक करार दिया है। उन्होंने कहा यह बेहद अच्छी पहल की गई है। सरकार को भविष्य में भी ऐसे कदम उठाने चाहिए।
भाजपा नेता एवं किसान प्रवीण रठौड़ा ने कहा किसान परेशानी से जूझ रहा था, भाजपा सरकार ने राहत देने का काम किया। यह बेहद अच्छी पहल की गई है। 
सरकार का सराहनीय कदम
बागपत। भाजपा जिलाध्यक्ष संजय खोखर ने कहा किसानों को बड़ा फायदा होगा। सरकार का कदम बेहद सराहनीय है।

समितियों से तैयार कराई थी सूची
शासन ने सहकारी समितियों और बैंकों से लिए कर्ज की सूची दो बार मांगी थी। पहली सूची में एक अप्रैल 2016 से 30 जून 2016 के बीच का कर्ज शामिल किया था, जबकि दूसरी सूची में पहली जुलाई 2016 से 28 फरवरी 2017 तक लिए कर्ज को शामिल किया था। दूसरी सूची में कर्ज का आंकड़ा कम था। अब देखना होगा कि कौन सी सूची को सरकार ने वरीयता दी है।
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