रथयात्रा महोत्सव की पूर्व संध्या पर सोमवार की रात पंच परमेष्ठी प्रचार समिति के बैनरतले आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने रचनाओं के माध्यम से सामाजिक व्यवस्था पर तीखे प्रहार किए।
कवि सम्मेलन का उद्घाटन धनेंद्र जैन ने किया। दीप प्रज्वलन रायचंद जैन ने किया। सम्मेलन का शुभारंभ अलीगढ़ से आई मुमताज नसीन ने सरस्वती वंदना से किया।
कवि सम्मेलन का संचालन करते हुए फरीदाबाद से आए दिनेश रघुवंशी ने काव्य पाठ करते हुए कहा गुलों की खुशबू तक में सियासत ढूंढ लेते हैं, ये मां के आंचलों तक में सियासत ढूंढ लेते है,ं सियासी लोग इतने भावना से शून्य है कि बस किसी के आंसुओं तक में सियासत ढूंढ लेते हैं।
लखनऊ से आई कविता तिवारी ने वीर रस की कविता सुनाते हुए कहा कि हर कोना भरा वीरता से इस भारत की अंगनाई का, बलिदान रहेगा सदा अमर मर्दानी लक्ष्मीबाई का।
अलीगढ़ से आई मुमताज नसीन ने कहा कि कर तो लूं ऐतराफे मोहब्बत तुम फसाना बना तो न दोगें, मै तुम्हें खत तो लिख दू, मगर तुम दोस्तों को दिखा तो न दोंगे। वहीं, राजस्थान से आए हास्य रस के कवि रामबाबू सिकरवार ने कहा ससुरे वोटर बड़े दगाबाज रे, चिकन खाई मुफ्त पी गए शराब रें।
वहीं डॉ. विष्णु सक्सेना ने कहा प्यास बुझ जाए तो शबनम खरीद सकता हूं, जख्म मिल जाए तो मरहम खरीद सकता हूं, ये मानता हूं मैं दौलत नहीं कमा पाया, मगर तुम्हारा हरेक गम खरीद सकता हूं। मध्य प्रदेश से आए जानी बैरागी ने कहा मुझे इस बात का गम है कि मेरा नाम बम है।
जयपुर से आए अशोक चरण कवि ने कहा क्यों रातों के घोर को जबरन मोर बनाते हो, आरक्षण देकर क्यों कमजोरों को और कमजोर बनाते हो। लखनऊ से आए हास्य रंगमंच के कलाकार सूर्यकुमार पांडेय ने कहा कितना शरीफ शख्स है, पत्नी पे फिदा, उस पर कमाल ये है कि वो अपनी पे तो फिदा है।
पूरी रात श्रोताओं ने कवि सम्मेलन का जमकर लुत्फ उठाया। कवि सम्मेलन को सफल बनाने में संजय जैन, अमन जैन, नवीन जैन, पंकज जैन, आशीष जैन, नीरज जैन, विनय जैन, अंकुर जैन, रवि जैन, आशीष जैन, ऋषभ जैन आदि का सहयोग रहा।