बड़ौत। आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि सत्य जीवन जीना है, तो कम से कम वार्ता करो। साधु पुरुष व्यर्थ का वार्तालाप नहीं करते। जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करना है तो संयम पूर्ण जीवन प्रारंभ करो। राग, द्वेष, मोह आत्मिक सुख में विघ्नकारी है। ज्ञानी व्यक्ति जीवन वैराग्य के साथ जीता है। स्वस्थ, सुंदर जिंदगी के लिए शाकाहारी भोजन मानव के लिए सर्वश्रेष्ठ आहार है।
जैन मुनि रविवार को ऋषभ सभागार, मान स्तंभ परिसर में दिगंबर जैन समाज समिति द्वारा आयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पौष्टिक संतुलित आहार ही औषधि है। शाकाहार ही मानव आहार है। शाकाहार मानव जीवन के अनुकूल होता है। मांसाहार विष के समान होते हैं। भोजन का भाव पर गहरा प्रभाव रहता है। अहिंसा धर्म ही सर्वश्रेष्ठ धर्म है। व्यक्ति को जीवो पर दया करनी चाहिए। मांसाहार के भक्षण से अनेक प्रकार की भयंकर बीमारियां हो जाती हैं। मांसाहार प्रकृति के विपरीत है। जीवो को पीड़ित करके उनके प्राणों का संघार करके किया गया आहार विष के समान है। अहिंसा ही धर्म का द्वार है। सभा में मुनि सुव्रतसागर महाराज ने भी मंगल प्रवचन दिया। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया की आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में 25 अक्टूबर को बड़ौत नगर में 8 जिन दीक्षाओं का भव्य आयोजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 18 नवम्बर से 22 नवम्बर तक आचार्य संघ के सानिध्य में नवनिर्मित चैत्य वृक्ष का भव्य पंचकल्यानक महोत्सव मनाया जाएगा।
दशलक्षण में कठोर साधना करेंगे जैन श्रद्धालु
विशुद्ध सागर महाराज सत्संग के पावन सानिध्य में दशलक्षण पर्व 19 सितंबर से 28 सितंबर तक ऋषभ सभागार में धूमधाम से मनाया गया जाएगा। इस 10 दिवसीय श्रावक संयम साधना संस्कार शिविर के माध्यम से श्रद्धालु कठोर साधना करेंगे और साधु जीवन व्यतीत करेंगे। शिविर में भारत के अनेक राज्यों से काफी संख्या में जैन श्रद्धालु बड़ौत पहुंचेंगे और आत्म कल्याण करेंगे। शिविर में सुबह 4:30 से अध्यात्म एवं योग प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके पश्चात पांच बजे से छह बजे तक आचार्य विशुद्ध सागर महाराज द्वारा ध्यान की विधि एवं प्रयोग बताए जाएंगे। प्रवचन, सामायिक, आहारचर्या, नीति की कक्षा, तत्वार्थ सूत्र, व्याख्यान, प्रतिक्रमण आचार्य भक्ति, जिज्ञासा समाधान, आरती, सामयिक आदि विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ यह आयोजन 10 दिन तक चलेगा।