बड़ौत। एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद दो साल पूर्व सरकार ने प्लास्टिक के प्रयोग पर बैन लगा दिया। करीब तीन से चार माह तक प्रशासनिक स्तर से कार्रवाई की गई, लेकिन धीरे-धीरे ढाक के पात वाली कहावत चरितार्थ हो गई। पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूक लोग भी भूल गए और अफसर भी सुस्त पड़ गए। इस कारण प्लास्टिक बैग के प्रयोग में तेजी से इजाफा हुआ। सुबह से लेकर शाम तक किराना, सब्जी, मीट समेत अन्य दुकानों पर प्लास्टिक का प्रयोग तेजी से होने लगा। इससे वातावरण प्रदूषित होने के साथ महामारी फैलने की गंभीर आशंका बनी रहती है।
700 व्यापारियों पर हुई कार्रवाई
नगर पालिका के सफाई निरीक्षक सुशील शर्मा के अनुसार डेढ़ साल में करीब 700 व्यापारियों पर कार्रवाई करते हुए चार लाख का जुर्माना वसूला गया और तीन क्विंटल से अधिक प्लास्टिक जब्त की गई। इसके बाद भी प्लास्टिक का प्रयोग नहीं थम रहा।
जल, थल और नभ के लिए खतरा
वन दरोगा रविकांत चौधरी ने कहा कि प्लास्टिक जल, थल और नभ तीनों के लिए खतरा है। मिट्टी में दबी प्लास्टिक सैकड़ों साल तक नष्ट नहीं होती। इससे जमीन बंजर होती जाती है। प्लास्टिक जलाने से हवा में जहरीली गैस जबकि पानी में जलीय जंतुओं के लिए खतरनाक है।
ये है मानक
50 माइक्रोन से ज्यादा के प्लास्टिक को रिसाइकल किया जा सकता है। 50 माइक्रोन से पतले प्लास्टिक के साथ ऐसा नहीं किया जा सकता है। घर के डस्टबिन में डाली जाने वाली ब्लैक थैलियां भी प्रतिबंध के दायरे में आती है।
इस समय पूरा जोर कोरोना वायरस से निपटने व बचाव पर लगाया जा रहा है। प्लास्टिक मानव जीवन के लिए घातक है, इसलिए कोरोना संकट से उभरते ही दोबारा से प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने को लेकर सख्ती से अभियान चलाया जाएगा। - अमित राणा, चेयरमैन, पालिका।
हम भी है जिम्मेदार
ऐसा नहीं है कि पॉलिथीन के इस्तेमाल और बेचने के लिए दुकानदार, सब्जी व फल विक्रेता ही जिम्मेदार है। इसमें हम भी अधिक जिम्मेदार है। जब हम घर से सामान लेने के लिए बाजार के लिए निकलते है तो बिना थैला लिए ही निकल पड़ते है। कई बार दुकानदार हमें टोकता भी है, लेकिन हम अगली बार थैला जरूर लाएंगे की बात कहकर टाल देते है। हम भी जागरूक होना होगा। तभी प्लास्टिक पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लगाया जा सकता है।