अब सपनों का आशियाना बनाना महंगा हो गया है। ईंट की कीमतों में दो हजार रुपये की बढ़ोत्तरी से आम आदमी के पास निर्माण रोक देने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया है। रेत के दाम भी आसमान छू रहे हैं।
पिछले करीब आठ माह में ही घर निर्माण की चीजों के दामों में बढ़ोत्तरी से लोग परेशान हैं। ईंट भट्ठे के संचालन पर रोक से परेशानी बढ़ी है। अकेले बागपत में करीब 450 ईंट भट्टे हैं, लेकिन एनजीटी की सख्ती के कारण भट्ठे बंद हैं।
130 भट्ठों को एनओसी मिल चुकी है, लेकिन अभी संचालन शुरू नहीं हो सका है। पिछले दिनों प्रदूषण विभाग और प्रशासन की टीम ने कई जगह छापे मारी की । भट्ठा संचालन के नए नियम परेशानी बने हैं। जिग जैग प्रणाली के बिना अब संचालन नहीं किया जा सकता, यही वजह है कि भट्ठे बंद हैं और ईंटों के दाम बढ़ रहे हैं।
यहां से ईंटें हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड तक सप्लाई की जाती है, लेकिन वर्तमान समय में ईंट सप्लाई बंद है। सरिया और रेत के दामों भी बढ़ोतरी हो गई है। ईट भट्ठा संचालक विनोद गोयल कहते हैं कि जिनके पास एनओसी है, उन भट्ठों को संचालन की छूट मिलनी चाहिए।
डस्ट का प्रयोग, रेत भी महंगा
बागपत। मौरंग के दाम में एक साथ बढ़ोत्तरी होने से लोगों का इससे मोहभंग हो गया है। लोग अब इसकी जगह डस्ट का प्रयोग कर रहे हैं। भवन निर्माण में पत्थर भी लगाया जा रहा है। उधर, रेत के दाम भी महंगे हैं। देहात क्षेत्र में रेत करीब एक सौ रुपये प्रति क्विंटल दिया जा रहा है, जबकि पहले इसके दाम सिर्फ तीस रुपये प्रति क्विंटल तक थे।
इस तरह बढ़ी कीमत
सामान पहले अब
ईंट प्रति हजार 3000 5000
सीमेंट प्रति बोरा 320 330
रेत प्रति कुंतल 35 80
रोडी प्रति कुंतल 80 90
डस्ट प्रति कुंतल 80 90
सरिया प्रति कुंतल 3200 4000
(नोट: दाम औसतन हैं।)
क्या कहते हैं लोग
बागपत में मकान का निर्माण कर रहे अधिवक्ता अनुज ढाका कहते हैं कि ईंटों समेत अन्य मैटेरियल के दाम बढ़ने से मकान निर्माण का बजट दोगुना हो गया है। बड़ौत निवासी प्रदीप शर्मा और राजेंद्र शर्मा बताते है कि भवन निर्माण सामग्री के सामान पर जीएसटी की मार है। इससे ईंट, रेत और लोहा महंगा हो गया है।