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टूट गई पॉलिथीन की आस, विकल्प की तलाश

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बड़ौत। पॉलिथीन मुक्त भारत अभियान के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक के सामानों पर शुक्रवार से बैन लगा दिया गया है। जिसके बाद व्यापारी विकल्प की तलाश में जुट गए हैं। कोई कागज का पैकेट तो कोई कपड़े का झोला इस्तेमाल करने में लगा है। व्यापारी ग्राहकों से भी घर से झोला ले आने की अपील कर रहे हैं। पॉलिथीन प्रतिबंधित होने के बाद रविवार को व्यापारियों व दुकानदारों से इसके बारे में बातचीत की गई कि अब उनका अगला कदम क्या होगा।
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बाजार में तमाम ऐसे उत्पाद हैं, जिनकी पैकेजिंग प्लास्टिक में ही संभव होती है। रोक लगा तो दी, लेकिन कहीं कोई तैयारी सरकारी व्यापारी या निर्माता स्तर पर नजर नहीं आ रही। व्यापारियों का कहना है कि बिना किसी तैयारी के प्लास्टिक और थर्माकोल बैन का दूसरा चरण लागू हो रहा है। ऐसे में व्यापारियों के चालान किए जाएंगे।
सच्चाई ये है कि इनके पास या तो किसी विकल्प की जानकारी नहीं है या फिर किसी तरह का विकल्प उपलब्ध ही नहीं है। जिसका नतीजा ये निकलता है कि सरकारी आदेशों में छोटे और मध्यम व्यापारियों को पिसना पड़ता है। फिर भी व्यापारी सरकार के इस फैसले को सराहनीय बता रहे हैं।
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घर से झोला लाने की अपील की जाएगी
बड़ौत। किराना दुकानदार अनुज कश्यप का कहना है कि सिंगल यूज प्लास्टिक से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा था। सरकार का इसे बैन करने का निर्णय सराहनीय है। अब हम पेपर के पैकेट तथा कपड़े के झोले का उपयोग करेंगे। ग्राहकों से घर से झोला लाने की अपील की जाएगी।
दुकानदार प्रवेश ने कहा कि अब ग्राहकों से अपील करेंगे कि वह घर से झोला ले आएं। पॉलीथिन मुक्त भारत अभियान में हम पूरा सहयोग करेंगे। लोगों को भी अभियान को सफल बनाने में सहयोग करना चाहिए। सब्जी विक्रेता अमित और अनिल का कहना है कि हम लोग पॉलीथिन बैग की जगह अब कपड़े के थैले का उपयोग करेंगे, जो ग्राहक घर से बैग नहीं ले आएंगे उनसे थैले का पैसा भी लिया जाएगा। सरकार के फैसले का सम्मान होगा।
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