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हिंदी शब्दों का भंडार ही नहीं वैज्ञानिक भाषा भी

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हिंदी हैं हम
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चिकित्सकों ने अमर उजाला फाउंडेशन के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की सराहना की
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। हिंदी भाषा को जानने वाले लोगों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। यह समृद्ध भाषा है। इसमें शब्दों का भंडार तो है ही इसके साथ यह वैज्ञानिक भाषा भी है। चिकित्सकों का मानना है कि हिंदी भारत माता का शृंगार है। विदेशों में भी हिंदी भाषा को लोग अपना भी रहे है और इसे सीख भी रहे है। हम सभी को हिंदी भाषा के उत्थान तथा प्रगति के लिए और भी ज्यादा प्रयास करने होंगे। उन्होंने अमर उजाला फाउंडेशन के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की सराहना की।
हिंदी बहुत समृद्ध भाषा
चिकित्सक डॉ. मनीष तोमर ने कहा कि हिंदी भाषा शब्दकोश के मामले में बहुत ही समृद्ध है। यूं तो भारत एक बहुभाषी देश है, लेकिन हिंदी की श्रेष्ठता के कारण इसे अधिकतर राज्यों में राजभाषा का स्थान मिला है। हिंदी भारत माता का शृंगार है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनेक कवियों और लेखकों ने अपनी लेखनी से देशभक्ति से ओतप्रोत काव्य और साहित्य रचा। इससे जनमानस में देशभक्ति की भावना पैदा हुई। अब हमारा यह कर्तव्य बनता है कि आने वाली पीढ़ी को हिंदी भाषा का महत्व बताएं। हिंदी भाषा को और भी ज्यादा लोकप्रिय तथा समृद्ध बनाने के लिए सतत प्रयास करें।
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विदेशों में भी अपनाई जा रही हिंदी
चिकित्सक डॉ. अनिल जैन का कहना है कि हिंदी भाषा में शब्दों का भंडार है। यह बहुत समृद्ध भाषा है। किसी देश की पहचान उसकी भाषा से ही होती है। हिंदी भाषा की पहचान देश में ही नही बल्कि विदेशों में भी है। यहीं नही हिंदी भाषा को लोग अपना भी रहे है और इसे सीख भी रहे है। आज की युवा पीढ़ी हिंदी भाषा के महत्व से अनजान है। अंग्रेजी भाषा अपनाने से युवा पीढ़ी हिंदी भाषा के महत्व को भूलती जा रही है।
मातृभाषा को अपनाकर देश को समृद्ध बनाएं
चिकित्सक डॉ. दिनेश बंसल का कहना है कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। जिस किसी भी राष्ट्र ने अपनी मातृभाषा को अपनाया है, वह उन्नति के शिखर पर पहुंचा है। चीन, कोरिया ,जापान आदि सभी देश अपनी मातृभाषा को अपनाकर ही इतने समृद्ध हुए हैं। विदेशों में भी हमारी पहचान हिंदी भाषा से ही है। किसी अन्य भाषा को अपनाकर हम भले ही कितनी उन्नति कर ले, लेकिन हमारी असली पहचान हिंदी से ही है। हमारा यह नैतिक कर्तव्य बनता है कि हम हिंदी भाषा के उत्थान तथा प्रगति के लिए और भी ज्यादा प्रयास करें।
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हिंदी भाषियों की संख्या में में निरंतर हो रही वृद्धि
चिकित्सक डॉ. आशीष पंवार का कहना है कि हिंदी भाषा संस्कृत से उत्पन्न हुई है। प्राचीन समय में भारत में संस्कृत राजकार्य की भाषा थी। धीरे-धीरे हिंदी कवियों व साहित्यकारों ने हिंदी का मानक रूप खड़ी बोली विकसित की। तबसे हिंदी शुद्ध रूप में देश के अधिकतर हिस्सों में बोली जाती है। हिंदी भाषी लोगों में निरंतर वृद्धि होती जा रही है।
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