हर साल केंद्र और प्रदेश सरकार बच्चों की पढ़ाई, उनके स्वास्थ्य, खेलकूद और अन्य सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है। बावजूद इसके शिक्षा विभाग के अफसरों की लापरवाही का खामियाजा सरकारी स्कूलों के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
इसकी बानगी बड़ौत तहसील के प्राथमिक विद्यालय पठानकोट में देखने को मिलती है। इस विद्यालय में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे किसी ने किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है। अधिकांश का इलाज दिल्ली, गाजियाबाद के बड़े अस्पतालों में चल रहा है। यहीं वजह है कि कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को विद्यालय मेें भेजना ही बंद कर दिया है। हैरत वाली बात यह है कि जानते हुए भी शिक्षा विभाग के आला अधिकारी मूकदर्शक बने हुए है।
बड़ौत तहसील के नगरीय क्षेत्र मेें पड़ने वाले प्राथमिक विद्यालय पठानकोट मेें 92 बच्चे पंजीकृत है। इन बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा एकमात्र सहायक अध्यापिका सरोज पर है। विद्यालय मेें न तो गर्मी से बच्चों को बचाने के लिए बिजली की व्यवस्था है और न ही विद्यालय में घुसने वाले बाहरी तत्वों से रक्षा करने वाली चार दीवारी।
विद्यालय मेें बच्चों के लिए खेलकूद के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। गांव का गंदा पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण विद्यालय परिसर में ही भरा रहता है। हर वक्त परिसर में जल भराव और गंदगी की समस्या बनी रहती है। सुबह और शाम के समय गांव के लोग इसके आसपास ही शौच करते है। इस कारण शिक्षा का यह मंदिर बच्चों को बीमारियां भी बांट रहा है। विद्यालय में पढ़ने वाला बच्चा किसी ने किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत मंगलवार को विद्यालय का हाल जाना तो इसका खुलासा हुआ। कक्षा चार मेें पढ़ने वाले तसबिया पुत्री नईम, कक्षा तीन मेें पढ़ने वाला बच्चा समीम पुत्र रफीक, कक्षा दो की शहनाज पुत्री जाकिर, सोफिया पुत्र अब्बास, आहद पुत्र इसरार, कक्षा पांच का मोनू पुत्र जाकिर समेत कई बच्चे चर्म रोग, टाइफाइड, मलेरिया, मियादी बुखार, खांसी, जुकाम, उल्टी-दस्त, पेट और त्वचा संबंधित रोग से ग्रस्त है। इनका इलाज दिल्ली के तेग बहादुर, मेरठ, गाजियाबाद आदि जगहों पर चल रहा है।
इस समस्या के कारण अभिभावक जाकिर, इस्लाम, आबिद, रहमान, अब्बास, इसरार, रफीक ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। इस संबंध मेें सहायक अध्यापिका सरोज का कहना था कि हर वक्त विद्यालय में जल भराव और गंदगी रहती है। इससे बच्चे बीमार हो रहे है। कई बच्चे गंभीर बीमारी से ग्रस्त है। कई बार बीएसए, एबीएसए और प्रशासनिक अफसरों के अलावा नगरपालिका के अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन समस्या जस की तस है।
अधिकारी कहिन
नगर पालिका की लापरवाही के कारण हर वक्त विद्यालय मेें गांव का गंदा पानी एकत्रित रहता है। अभिभावकों द्वारा कुछ बच्चों के बीमार होने की शिकायत मिली थी। इस संबंध में अधिकारियों को सूचित किया गया है।
- डॉ. प्रभात कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी।
स्कूल की समस्या की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो शीघ्र ही पानी निकासी की व्यवस्था की जाएगी। बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे।
- केपी मलिक, चेयरमैन, नगर पालिका।