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उमड़ा आस्था का सैलाब, लाडू चढ़ाकर कमाया धर्म लाभ

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बड़ौत के दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज में लडडू चढ़ाते विधायक। - फोटो : BARAUT
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उमड़ा आस्था का सैलाब, लाडू चढ़ाकर कमाया धर्म लाभ
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बड़ौत। गुप्तिसागर महाराज, पुरणमती माता और दिव्यामति माता के पावन सानिध्य में बृहस्पतिवार को श्री 1008 आदिनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने 65 फीट ऊंचे मान स्तंभ पर मोक्ष कल्याणक का लाडू चढ़ा कर परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि की कामना की।
आदिनाथ भक्तामर प्रचार संगठन के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में सौधर्म इंद्र धनेंद्र जैन, अंजू जैन, कुबेर इंद्र अर्पित जैन, ईशान इंद्र दीपक जैन, सनत इंद्र नीरज जैन, महेंद्र इंद्र, पंकज जैन को बनने का सौभाग्य प्राप्त किया। मुख्य अतिथि पवन जैन, हंस जैन, समारोह गौरव नवीन जैन बब्बल रहेे। ध्वजारोहण धन कुमार, उद्घाटन विजय जैन, चित्र अनावरण अरुण जैन, दीप प्रज्ज्वलन विजय जैन सोनू ने किया। जिनेंद्र जैन ने सभी अतिथियों का पटका पहनाकर व तिलक लगाकर स्वागत किया। विशिष्ट अतिथि विधायक सहेंद्र सिंह, चेयरमैन अमित राणा, जिलाध्यक्ष सूरजपाल सिंह गुर्जर, अर्जुन अवाड़ी शौकेंद्र पहलवान, हिंद केसरी सुभाष पहलवान ने भी लाडू चढ़ाकर धर्म प्रभावना की। सर्वप्रथम सौधर्म इंद्र ने श्रीजी का अभिषेक किया। पंडित संजय जैन के निर्देशन में विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना की गई।
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इस अवसर पर उपाध्याय श्री गुप्ति सागर ने कहा कि हम सब बहुत भाग्यशाली और पुण्यशाली है, जो जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जी के मोक्ष कल्याणक का लाडू चढ़ा रहे हैं। आदिनाथ भगवान ने अंक विद्या, व्यापार, लिपि, ब्रह्मलिपी और कृषि का ज्ञान देकर मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाई। विश्व को अहिंसा का ज्ञान दिया। कार्यक्रम में उपजिलाधिकारी दुर्गेश मिश्र, सीओ आलोक, अजय शर्मा, टेकचंद, संदीप, नीरज, रमेश, धनपाल, डॉ आरके जैन, प्रमोद, देवेंद्र, पवन, अनिल, गौरव, धनेंद्र, सचिन, अशोक आदि सहित सकल जैन समाज व सभी सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी व गणमान्य व्यक्ति शामिल रहे।
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1008 दीपकों से की गई आरती
बड़ौत। गांधी रोड स्थित मान स्तंभ परिसर में बृहस्पतिवार की सुबह करीब छह बजे से लाडू चढ़ाने की शुरूआत हुई। अल सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। लाडू चढ़ाने का यह सिलसिला शाम तीन बजे तक चला। इसके बाद 1008 दीपकों से श्री 1008 भगवान आदिनाथ जी की आरती की गई। भक्तांबर जी का पाठ किया गया।
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