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सड़कों पर गोवंश, हवाई साबित हुए सरकार के दावे

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बागपत कोर्ट रोड पर कूड़े पर मौजूद गोवंश - फोटो : BAGHPAT
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बागपत। किसानों की सबसे बड़ी समस्या बने आवारा गोवंशीय पशुओं से इस साल भी निजात नहीं मिल सकी। प्रत्येक गांव में सड़कों और खेतों में गोवंश नजर आते हैं। एक तरफ फसलों को खतरा है और दूसरी तरफ गोवंशीय पशु हादसों की वजह भी बन रहे हैं। किसान और ग्रामीण रोज शिकायत कर निजात दिलाने की मांग करते रहे, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकाला। जहां सरकार की ओर से गोवंश आश्रय स्थल बन रहे थे, वह भी अधूरे पड़े है। हालत ऐसे है किसानों को खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आवारा गोवंशीय पशुओं को संरक्षण देने की पहल की और हर ग्राम पंचायत में अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल बनाने की घोषण की थी। भरण-पोषण के लिए बजट निर्धारित किया गया। जिले की 245 ग्राम पंचायतों में से केवल 17 में ही अस्थाई आश्रय स्थल बनाए गए। अन्य गांवों में सैकड़ों की संख्या में गोवंश सड़कों पर घूम रहे है। इनसे किसान तो परेशान है ही, आम जन भी त्रस्त है। सड़कों पर झुंड में घूम रहे इन गोवंश की वजह से हादसे भी हो रहे है। रोज ग्रामीण निजात दिलाने की मांग करते आ रहे है, लेकिन प्रशासन शिकायतों के निस्तारण कराने में बेबस नजर आ रहा है। अफसरों की फाइलों में शिकायतें धूल फांक रही है, पर निस्तारण पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
सीडीओ पीसी जायसवाल ने कहा कि गोवंशीय पशुओं की समस्या का समाधान कराया जा रहा है। कान्हा गोशाला और गो-संरक्षण केंद्र संचालित हो गए है। अन्य गांव में भी समस्याओं का समाधान करा दिया जाएगा।
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1906 संरक्षित, तीन-चार हजार गोवंश सड़क और खेतों में
बागपत। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में 17 और शहरी क्षेत्रों में पांच अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल संचालित है। टीकरी नगर पंचायत में कान्हा गोशाला और खट्टा प्रहलादपुर गांव में गोसंरक्षण केंद्र संचालित है। यहां करीब 1906 गोवंशीय पशुओं को संरक्षित किया हुआ है। जबकि जिले में करीब तीन से चार हजार गोवंशीय पशु सड़कों पर घूम रहे है।
आश्रय स्थलों से गोवंश लेने पर 900 रुपये का अनुदान
बागपत। शासन ने आश्रय स्थलों से गोवंश को पालन के लिए लेने पर 900 रुपये प्रतिमाह रुपये दिए जाने का नियम बनाया है। इसके चलते केवल 150 व्यक्ति ही अभी तक गोवंशों को पालन के लिए लेकर गए है। पूरी प्रक्रिया के साथ गोवंश को उनके सुपुर्द किया गया है।
गोवंशीय पशुओं की मौत पर होते रहे बखेड़े
बागपत। गोवंश आश्रय स्थलों में गोवंशीय पशुओं की दुर्गति भी खूब हुई है। इस वर्ष दर्जनों गोवंशीय पशुओं की मौत हो गई। इसे लेकर लोगों में रोष व्याप्त हो गया। खट्टा प्रहलादपुर के आश्रय स्थलों में गोवंश की मौत पर साधु संतों ने आंदोलन तक की चेतावनी दी थी।
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