मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में अनुपम खेर के साथ बागपत की शूटर दादी प्रकाशो तोमर।
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बागपत के जौहड़ी की शूटर दादी प्रकाशो तोमर की कामयाबी की कहानी का कायल अब गूगल भी हो गया है। विल पावर कार्यक्रम में इंटरनेशनल ट्रैप शूटर सीमा तोमर की मां प्रकाशो तोमर ने अपने अनुभव साझा किए। अभिनेता अनुपम खेर ने उनका स्वागत किया।
मुंबई में आयोजित गूगल के एक कार्यक्रम में शूटर दादी प्रकाशो तोमर ने अपने अनुभव साझा किए। दादी ने बताया कि वह शुरुआत में हाथ को पक्का करने के लिए जग में पानी भर कर उसे पकड़ने का अभ्यास किया करती थीं, जिससे कि रिवाल्वर थामते समय हाथ हिले नहीं। वुमेन विल कार्यक्रम की शुरुआत में अभिनेता अनुपम खेर ने प्रकाशो तोमर के बारे में बताया। प्रकाशो का जन्म वर्ष 1936 में हुआ था। आठ बच्चों की मां और 17 बच्चों की दादी प्रकाशो ने 60 साल की उम्र में रिवाल्वर थाम शूटिंग रेंज में परचम लहरा दिया।
कैसे शूटर बन गई दादी?
बागपत। दादी ने बताया कि जौहड़ी में पोती ने अकेले शूटिंग रेंज में जाने से इनकार किया तो मैं उसके साथ गई। वहां लड़के भी शूटिंग प्रैक्टिस किया करते थे। वहां सभी ने मुझे भी शूटिंग में हाथ आजमाने को कहा। मैंने शूटिंग ट्राई की तो मेरा निशाना सही लगा। इसके बाद मैं लगातार इसका अभ्यास करने लगी। अपने हाथ को और स्थिर करने के लिए मैंने जग में पानी भर कर जग को ऐसे पकड़ने का अभ्यास किया जैसे कि राइफल या पिस्टल पकड़ी जाती है। इस तरह मैं एक साल तक घर का काम करने के बाद यह करती थी, इससे मेरा हाथ मजबूत हो गया।
डीआईजी को हराकर जीता था गोल्ड
बागपत। दादी ने बताया कि सबसे पहले दिल्ली में डीआईजी को हराकर मैंने गोल्ड मैडल जीत लिया। इस पर डीआईजी बोले की औरत के सामने मेरी बेइज्जती हो गई। इसके बाद गांव का माहौल बदला।