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क्षमा आत्मिक गुण है, क्षमा अहिंसा है, क्षमा जीवन-नीति है : आचार्य विशुद्ध सागर

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-जैन मुनि शनिवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल
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फोटो संख्या 1
बड़ौत। जैन दिगम्बराचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि वस्त्र में मलिनता है जब-तक यह बोध नहीं होगा, तब-तक कोई वस्त्र नहीं धुलेगा। वस्त्र को स्वच्छ करना है तो पानी चाहिए, ऐसे ही परिणामों की पवित्रता चाहिए तो गुरुवाणी चाहिए।
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जैन मुनि शनिवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि क्षमा आत्मिक गुण है। क्षमा अहिंसा है। क्षमा जीवन-नीति है। क्षमा धर्म का आधार है। क्षमा शांति का उपाय है। नीतिज्ञ पुरुष बीज को नष्ट नहीं करते, वह बीज से फसल उगाते हैं। बीज को बचाकर रखते हैं, शेष का उपभोग करते हैं। संसार के सुख चाहिएं तो पुष्य का संग्रह करो। पुण्योदय पर संसार के सर्व-सुख प्राप्त होते हैं। पुण्य के अभाव में प्राप्त सम्पत्ति भी नष्ट हो जाती है। जिनका पुण्य क्षीण है, वह न तो गुरुवाणी सुन सकते हैं और न ही प्रभुभक्ति कर सकते हैं। पुण्यात्मा के ही श्रेष्ठ-कार्य करने के परिणाम होते हैं। जो धूम्रपान करता है, व्यसन करता है, उसके संसर्ग से भी कैंसर का रोग हो जाता है। जैसा संसर्ग करोगे, वैसा भाव होगा। विचारों का जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। विचारवान बनो। विचार करोगे, वैसा कार्य होगा। विचार प्रभावित करते हैं। श्रेष्ठ-विचारकों का साहित्य पढ़ो, विचारों से विकास होता है। अच्छे-विचार पढ़ो, विनाश से बच जाओगे। क्रोध का अंधा, पुण्य क्षीण, ईष्यालु-पुरुष स्वयं-ही ऐसे खोटे काम करता है, जिससे कष्ट को प्राप्त होता है। पुण्य कार्य करो, पाप से बचो। सभा का संचालन पंडित श्रेयांस जैन ने किया।
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