हिंडन नदी में बहता फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी।
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने वेस्ट यूपी के छह जिलों में हिंडन, कृष्णा और काली नदी के किनारे स्थित 316 फैक्ट्रियों से निकलने वाले पानी की जांच के लिए स्पेशल कमेटी गठित करने के आदेश दिए हैं।
दोआबा पर्यावरण समिति की याचिका पर उक्त आदेश दिए हैं। एनजीटी ने यूपी सरकार से नदियों को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए किए गए कार्यों की रिपोर्ट मांगी, लेकिन सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया।
दोआबा पर्यावरण समिति के चेयरमैन डॉ. चंद्रवीर सिंह और अधिवक्ता गौरव बंसल ने बताया कि मंगलवार को एनजीटी में उनकी ओर से प्रदूषित जल पर दाखिल याचिका पर सुनवाई की गई। वेस्ट यूपी के सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत और गाजियाबाद में भूजल और पेयजल के बारे में कोर्ट ने सरकार से अब तक के कार्यों का लेखा जोखा मांगा।
सरकार के अधिवक्ता कोई जवाब नहीं दे पाए। जस्टिस साल्वी की कोर्ट ने इसको गंभीरता से लिया और सरकार को एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन करने के आदेश दिए। कमेटी में केंद्रीय प्रदूषण विभाग, राज्य सरकार के प्रदूषण नियंत्रण विभाग एवं जल निगम की टीम एक साथ सर्वे करेगी।
इन तीनों नदियों में अब तक प्रदूषण घटा है या नहीं। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि इन सभी छह जिलों में हिंडन, कृष्णा और काली नदी के किनारे लगी हुई 316 फैक्ट्रियों की जांच गठित की जाने वाली यही टीम जांच करेगी। गौरतलब है कि हैंडपंप से दूषित पानी निकलने और नदियों के प्रदूषण से फैल रही बीमारियों को लेकर हंगामा हो चुका है।