बड़ौत। समाज में बदलाव लाने के लिए कभी-कभी एक व्यक्ति की सोच ही काफी होती है। नगर के गुराना रोड निवासी कांता राजपूत इसका जीता-जागता उदाहरण है। बीते 25 वर्षों से वे निशुल्क सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण देकर 150 से अधिक महिलाओं और बेटियों को आत्मनिर्भर बना चुकी हैं।
कांता राजपूत का जीवन कभी आसान नहीं रहा। आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। वह कहती हैं कि जब खुद कठिनाइयों से गुजर रहीं थीं, तभी उन्होंने तय किया कि औरों की जिंदगी आसान बनाने के लिए उन्हें कुछ करना है। इस सोच से ही उन्होंने घर पर ही सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण शुरू किया।
- बदलाव की मिसाल
उनके प्रयास से जुड़ी महिलाएं रेखा, बबीता, संगीता, पूजा समेत अन्य महिलाएं अब परिवार का सहारा बनी हैं। कई महिलाएं खुद छोटे-छोटे बुटीक और टेलरिंग सेंटर चला रहीं हैं। वहीं, कुछ ने अपने हुनर से बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाया है। समाज में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का बीज बोना ही कांता का असली मिशन है। कांता कहती है कि किसी महिला को अपने पैरों पर खड़ा होते देखना मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है। बेटियों और बहनों को हुनर देकर उनके चेहरे पर मुस्कान लाना ही मेरी सबसे बड़ी कमाई है।