बागपत। गेहूं की फसल पर पहले मौसम की मार पड़ी और अब गोवंशीय पशुओं ने परेशानी खड़ी कर दी है। सड़कों और खेतों में घूम रहे पांच हजार गोवंशीय पशु खेतों में घुसकर गेहूं की फसल को तबाह कर रहे है। फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा। मौसम खराब हो जाने से पहले ही बुवाई देरी से हुई। कुछ किसान तो अब तक गेहूं के बुवाई में जुटे हुए हैं। किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल के लिए गोवंशीय पशु और जंगल नील गाय खतरा बन गई है। रोजाना झुंड में यह पशु खेतों में घुसकर फसल को उजाड़ रहे हैं। जाहिर है इसका असर उत्पादन पर पड़ेगा।
गोशालाओं में सिर्फ दो हजार पशु
बागपत। जिले में 17 गोआश्रय केेंद्र बनाए गए हैं। एक कान्हा गोशाला है और एक गोसंरक्षण केंद्र हैं। शहरी क्षेत्र में गोआश्रय स्थल हैं। इनमें सिर्फ दो हजार गोवंशीय पशु ही रखे गए हैं।
किसानों ने दी भूख हड़ताल की चेतावनी
दोघट। कान्हड़ गांव में आवारा गोवंशीय पशु किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया। किसानों ने अनिश्चितकालीन भूखहड़ताल पर बैठने का निर्णय लिया। किसान सूर्य प्रकाश अहलावत ने बताया कि कान्हड़ गांव में आवारा गोवंशीय पशुओं के लिए प्रशासन ने गोशाला का निर्माण नहीं कराया। पशु किसानों की गेहूं, गन्ने की फसल बर्बाद कर रहे हैं। किसान सर्दी में रातभर खेत पर निगरानी करते हैं। जल्द ही किसान समस्या के समाधान के लिए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। चेतावनी दी कि जब तक समस्या का समाधान नहीं होता भूख हड़ताल समाप्त नहीं होगी।
अधूरे गोशाला केंद्रों पर तेजी से निर्माण किया जा रहा है। निर्माण पूरा होते ही पशुओं को शिफ्ट करने की प्रक्रिया की जाती है। किसानों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। किसी गांव में अगर बड़ी समस्या है तो जांच कराई जाएगी। - पीसी जायसवाल, सीडीओ।