उस दौरान ही वर्ष 2011 में बागपत के पुराने कस्बे के रहने वाले वीरेंद्र सिंह को चौकीदार के पद पर भर्ती किया गया था। जिसका प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव भी पास किया गया और तत्कालीन सचिव वीके आनंद ने नियुक्ति पत्र भी दिया। जिसके बाद से वीरेंद्र सिंह लगातार कार्य करता रहा, लेकिन वर्ष 2017 से वीरेंद्र सिंह का वेतन बंद कर दिया गया।
वीरेंद्र सिंह को कहा गया कि अब उनका वेतन नहीं निकाला जा सकता है। जिससे वह हाईकोर्ट चला गया तो वहां से भर्ती संबंधी सभी फाइलों को देने के लिए कहा गया। लेकिन आज तक भी भर्ती संबंधी फाइलों को नहीं दिया गया।
वीरेंद्र सिंह का आरोप है कि उससे लिखकर दिया गया कि प्राधिकरण के कार्यालय से भर्ती से संबंधित फाइलें गायब हो गई है। जबकि उसके पास बोर्ड के प्रस्ताव से लेकर नियुक्ति पत्र समेत सभी कागजात है। उसने आरोप लगाया कि प्राधिकरण से फाइलों को गायब कर दिया गया है।
अवैध कॉलोनियों से संबंधित फाइलें भी गायब होने का शक
विकास प्राधिकरण से अवैध काॅलोनियों को नोटिस जारी किया जाता है। लेकिन नोटिस जारी करने के बाद फाइलों को दबा दिया जाता है। आरोप लगाया गया कि उन अवैध काॅलोनियों से जुड़ी फाइलों को भी गायब कर दिया गया है। जिसकी जांच होने पर स्थिति साफ होगी कि वहां से कितनी फाइल गायब है।
इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। इसका पता कराया जाएगा और उसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मेरे पास शिकायत आती है तो उसके आधार पर जांच कराई जाएगी। - जितेंद्र प्रताप सिंह, डीएम