शामली। खेत में पराली से लेकर पत्ती जलाने वाले किसानों पर कृषि विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। खेत में पराली जलाने वाले किसानों को अब कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा। अमर उजाला में प्रकाशित खबर के बाद कृषि विभाग ने कई स्थानों पर अभियान चलाया।
अमर उजाला ने 28 नवंबर के अंक में जिला बनने के 12 साल बाद भी एक्यूआई मापने की सुविधा नामक शीर्षक से प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित की थी, जिसमें खेत में पत्ती जलाने के मामलों का भी खुलासा किया था। कृषि विभाग के अधिकारियों ने शामली, कांधला, कैराना और अन्य स्थानों पर अभियान चलाया। थानाभवन में किसान जमशेद द्वारा खेत में पत्ती जलाने की सूचना कृषि विभाग को सेटेलाइट के माध्यम से मिली। उक्त किसान को विभाग की योजनाओं से वंचित रखा जाएगा।
उप कृषि निदेशक प्रमोद कुमार ने बताया कि जनपद में अब तक 26 सूचनाएं सेटेलाइट के माध्यम से प्राप्त हुईं, जिनमें एक मामला पराली जलाने, गन्ने की पत्ती जलाने की 8 और कूड़ा अवशेष जलाने की नौ तथा 8 अन्य सूचनाएं मिली हैं। संबंधित कृषकों से जुर्माने की 25 हजार रुपये की वसूली की जा चुकी है तथा कृषि विभाग एवं गन्ना विभाग की कई सुविधाओं से भी वंचित किया जा रहा है।
किसानों को यह सलाह दे रहे कृषि विभाग के अधिकारी
कंबाइन से धान की कटाई करते समय अनिवार्य रूप से एसएमएस का प्रयोग करना सुनिश्चित करें। कोई भी कंबाइन हार्वेस्टर स्वामी बिना एसएमएस के धान की कटाई करते हुए पाया जाता है तो उसको तुरन्त सीज कर दिया जाएगा। कृषि विभाग द्वारा जनपद शामली को 20 हजार बायो डीकम्पोजर का लक्ष्य प्राप्त हुआ था जिसके सापेक्ष सभी 20 हजार बायो डीकम्पोजर का वितरण किया जा चुका है। उप कृषि निदेशक ने किसानों से खेतों में पराली या पत्ती नहीं जलाने की अपील की है।