जिले के किसान दिल्ली की नरेला मंडी और हरियाणा में बेचते हैं धान
जिस वैरायटी की खेती करते हैं, उसकी जिले में नहीं होती है खरीद
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। धान की फसल लगभग पककर तैयार हो गई है। पिछले साल के सापेक्ष इस बार एक हजार हेक्टेयर धान का रकबा बढ़ा है। जिले के किसान धान को दिल्ली की नरेला मंडी में बेचने जाते हैं। स्थानीय स्तर पर धान की फसल की खरीद नहीं की जाती है। इसकी वजह यह है कि किसान धान की जिस वैरायटी की बुआई करते हैं, उसकी सरकारी खरीद नहीं की जाती है।
जिले में धान की फसल लगभग पककर तैयार हो गई है। कोरोना काल में जिले में धान का रकबा करीब एक हजार हेक्टेयर बढ़ा है, लेकिन जिले में धान खरीद के लिए केंद्र नहीं बनाए जाते हैं। सरकारी स्तर पर मोटे धान की खरीद होती है, जबकि जिले में धान की पीबी 1509 और पीबी 1121 वैरायटी की फसल होती है। जिले में खरीद नहीं होने के कारण किसान दिल्ली की नरेला मंडी में धान को बेचने जाते हैं। इसके अलावा हरियाणा के सोनीपत की मंडियों में भी धान बेचने को जिले के किसान पहुंचते हैं।
इनसेट
जिले में होना चाहिए खरीद का इंतजाम
बागपत। भाकियू के जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर का कहना है कि सरकार को किसान की फसल खरीदने का जिले में ही इंतजाम करना चाहिए। हर वर्ष यही समस्या आती है। किसान अपनी सुविधा के अनुसार और बाजार के हिसाब से फसल पैदा करता है, लेकिन बाद में सरकार धान की फसल की खरीदती नहीं। किसान को मजबूर होकर दूसरे राज्यों की तरफ रुख करना पड़ता है।
- किसान इंद्रपाल सिंह का कहना है कि अगर किसान को अपनी फसल का बेहतर भाव मिले और जिले में ही फसल की खरीद की जाए तो किसान बाहर क्यों जाएगा। मंडी तक जाने में किसान को नुकसान उठाना पड़ता है।
वर्जन :
जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप का कहना है कि इस बार करीब सात हजार हेक्टेयर में धान की फसल है। पिछली बार की अपेक्षा लगभग एक हजार हेक्टेयर रकबा बढ़ा है।