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किसानों ने पूछा, गन्ने का भाव बढ़ाए बिना कैसे दोगुनी होगी आय?

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भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह - फोटो : BAGHPAT
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- सरकार को कम से कम 350 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का भाव देना चाहिए था
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अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाए जाने से किसानों के बीच नाराजगी है। किसानों का कहना है कि अगर रसोई गैस और डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ सकते हैं तो गन्ने का मूल्य क्यों नहीं बढ़ाया गया। किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। सहकारी चीनी मिल बागपत में गन्ना सप्लाई करने पहुंचे किसानों ने कहा कि खेती पर हर साल खर्च बढ़ रहा है। सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, लेकिन आय बिना फसलों का दाम बढ़ाए कैसे दोगुनी हो सकती है।
सांकरौद गांव के किसान राजेश सिंह का कहना है कि फसलों पर लागत बढ़ रही है, ऐसे में गन्ने का मूल्य बढ़ाया जाना चाहिए था। इसी गांव निवासी सुशील कुमार का कहना है कि सरकार को कम से कम 350 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गन्ना मूल्य किसानों को देना चाहिए। नैथला गांव निवासी सुरेंद्र कुमार का कहना है कि किसानों की आय अगर दोगुनी करनी है तो फसलों का वाजिब दाम देना होगा। काठा गांव के राजबीर का कहना है कि इस बार किसान उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन पिछले तीन साल की तरह ही निराशा हाथ लगी है।
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दावों पर खरी नहीं उतरी सरकार : राजेंद्र
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह का कहना है कि गन्ने का भुगतान दिलाने में सरकार अपने दावे पर खरी नहीं उतरी है। सरकार ने गन्ना मूल्य न बढ़ाकर किसान विरोधी होने का पुख्ता सबूत पेश कर दिया है।
किसानों की टूट रही कमर : रविंद्र
सहकारी चीनी मिल रमाला के पूर्व उपाध्यक्ष रविंद्र मुखिया ने बताया कि किसानों को इस सरकार से निराशा के अलावा कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। सरकार किसानों के अहित के लिए तीन काले कानून थोप रही है। किसानों का गन्ना मूल्य न बढ़ाकर डीजल के दाम रोज बढ़ा रही है। इससे किसानों की कमर टूट रही है।
गन्ने के भाव को बताया नाकाफी
दोघट। कस्बा टीकरी मे मास्टर महेंद्र सिंह के घेर में किसानों की बैठक हुई। इसमें प्रदेश सरकार द्वारा घोषित गन्ना मूल्य को नाकाफी बताया।
किसान बाबूराम ने कहा कि आज गन्ने की लागत और आर्थिक हालात को देखते हुए भाव 400 रुपए प्रति क्विंटल होना चाहिए था। किसान अतर सिंह ने बताया कि किसानों के मुद्दों पर योगी सरकार फेल हो गई है। 2017 के चुनावी भाषणों में प्रधानमंत्री और सीएम ने बड़े ही जोर शोर से 14 दिन में गन्ना पेमेंट कराने का वादा किया था। जो पूरी तरह से खोखला साबित हुआ है। मास्टर महेंद्र सिंह, योगेंद्र सिंह, करतार सिंह, बिजे सिंह, संजीव राठी, सुनील राठी, देशपाल, मनोज, राजपाल और वीरसेन आदि रहे। उधर, बामनौली गांव की चौपाल पर हुई किसानों की बैठक में गन्ना मूल्य न बढ़ाने पर रोष जताया गया। गजे सिंह, नरेश डायरेक्टर, सतवीर, सुभाष, जयप्रकाश, कोशिंद्र, संजीव, जसवंत सिंह, गजेंद्र, रामकुमार, नीरज, रामबीर मौजूद रहे।
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जयंत ने ट्वीट कर किया सरकार पर कटाक्ष
बागपत। राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने ट्वीट कर सरकार पर कटाक्ष किया। ट्वीट कर कहा कि ‘तीन साल में नहीं बढ़ा पाई गन्ना मूल्य भाजपा। इस बार बाबा का मन तो घटाने का था और इसलिए इतनी देर की, लेकिन किसान आंदोलन के चलते हिम्मत नहीं हुई। चुनाव के समय 14 दिन में गन्ना भुगतान का वादा करने वाली भाजपा के शासन में आज उत्तर प्रदेश के किसानों का 10,174 करोड़ रुपये बकाया है। प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य घोषित करने में देर कर मिल मालिकों को फायदा पहुंचाया है। भाजपा सरकार को किसानों के दुख-दर्द से कोई मतलब नहीं है’।
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