बागपत। जिले के परिषदीय विद्यालय बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। शौचालय की हालत दयनीय है। हैंडपंप पर हमेशा गंदगी रहती है। छात्रों के खेलने के लिए मैदान नहीं है। यहां तक शिक्षकों की भी कमी है। इंग्लिश माध्यम की शिक्षा तो दावों में ही सिमटकर रह गई है।
इलाहाबाद जिले के ही नहीं बल्कि बागपत जनपद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की हालत बदतर है। सही निरीक्षण किया जाए तो सच्चाई सामने आएगी। विद्यालय आधार भूत सुविधाओं से वंचित है। जिला मुख्यालय से सटे गांव खुब्बीपुर निवाड़ा के उच्च प्राथमिक विद्यालय की हालत खस्ता है। स्कूल के 139 छात्र और छात्राओं के लिए शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं है। विद्यालय के परिसर में ही झाड़ झंकार उगे है।
हैंडपंप के आसपास हमेशा गंदगी रहती है। गांव का गंदा पानी विद्यालय के सामने एकत्र रहता है। दीवार टूटी है। बच्चों के खेलने के लिए मैदान नहीं है। खिड़कियों के छज्जे क्षतिग्रस्त हैं। बरसात के दिनों में विद्यालय की हालत बद से बदतर हो जाती है। प्रधानाध्यापक राजकुमारी ने कहा सभी कमियों के लिए विभाग को अवगत करा दिया गया है। टूट फुट जो हुई है, वह भवन निर्माण के दौरान हुई।
पूर्व प्रधान बोले, विद्यालय में हैं समस्याएं
बागपत। गांव खुब्बीपुर निवाड़ा के पूर्व प्रधान शौकीन ने बताया प्राथमिक विद्यालय में समस्याओं का अंबार है। दीवार टूटी है। बच्चों के खेलने के लिए व्यवस्था नहीं है। स्कूल में हमेशा गंदगी रहती है। हैंडपंप लगा है, लेकिन पानी दूषित है। अपने कार्यकाल में विद्यालय का भराव कराया था। इसके बाद जलभराव की समस्या से निजात मिली थी।
मिड-डे मील के दौरान एकत्र हो जाते हैं कुत्ते
बागपत। हमीदाबाद उर्फ नया गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में नजारा ही कुछ ओर रहता है। छात्रों के मिड-डे मील के समय आवारा कुत्ते एकत्र हो जाते हैं। विद्यालय की दीवार टूट हुई है। बाहर हमेशा लोगों की भैंसें बंधी रहती है। कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। प्रभारी प्रधानाध्यापक मोनिका ने बताया कि समस्याओं की शिकायत विभाग से कर दी गई है, कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
बिलौचपुरा में 127 बच्चों पर एक शिक्षक
बागपत। दो साल से बिलौचपुरा के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 127 बच्चों को एक अध्यापक तैनात है जो तीन कक्षाओं के बच्चों को पढ़ने में असमर्थ है। शिक्षक ने कहा कई बार अधिकारियों से मांग की, लेकिन कोई नियुक्ति नहीं है। पिछली वर्ष यहां पर 250 छात्र और छात्राएं पंजीकृत थी। शिक्षकों की कमी के कारण इस बार अभिभावकों ने बच्चों के दाखिले नहीं कराए। इस सत्र की पुस्तकें भी नहीं मिली है।