बारिश के बीच स्कूल से आते बच्चे।
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मौसम ने फिर करवट बदली। बादल गरजे और झमाझम बारिश हुई। किसानों के चेहरे खिल गए। किसानों और कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि गेहूं की फसल के लिए बारिश सोने जैसी है अन्य फसलों को भी नुकसान नहीं होगा। गेहूं की पैदावार बढ़ जाने की संभावना है। बारिश के कारण पारा लुढ़क गया। यही नहीं सड़कों पर आवागमन प्रभावित हुआ, बाजार में भी चहल-पहल कम रही।
मंगलवार को सुबह से ही आकाश में बादल छा गए। हवा ने ठंडक बढ़ा दी। करीब 11 बजे बारिश शुरू हो गई। तीन घंटे तक रूक-रूककर बरसात होती रही, इससे जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विज्ञान विभाग की मानें तो जिले में करीब पांच मिमी बरसात हुई है। कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा के अध्यक्ष डॉ. गजेेंद्र सिंह का कहना है कि बरसात से गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा फायदा है। नुकसान किसी भी फसल को हीं है।
तेज हवा के साथ अगर बारिश होती तो सरसों को नुकसान हो सकता था, लेकिन हवा की रफ्तार ज्यादा तेज नहीं रही। बरसात से गेहूं की फसल की हल्की सिंचाई हो गई, यही नहीं फसलों और पौधों की पत्तियां साफ हो गई, इससे उन्हें भोजन बनाने में आसानी होगी। बारिश के कारण बाजार में ग्राहकों की संख्या प्रभावित हुई। दुकानों पर ग्राहक नजर नहीं आए। इसके अलावा सड़कों पर वाहनों का आवागमन भी प्रभावित रहा।
दोपहर करीब साढे़ तीन बजे हल्की धूप खिली, तब लोग घरों से निकले। बारिश होने से कोल्हू में गुड़ बनने का काम प्रभावित रहा। मौसम खराब होने के कारण कोल्हू संचालकों ने गन्ने की खरीददारी नहीं की। इस कारण किसानों को परेशानी हुई। मिल की लाइन में लगे गन्ना किसानों को भी काफी परेशानी हुई। इससे आगामी दिनों में गुड़ के रेट बढ़ने की उम्मीद है। बारिश से आलू की खुदाई भी बंद हो गई।