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संभावित प्रत्याशियों के आपराधिक रिकार्ड पर नजरें

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बड़ौत। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आरक्षण की तस्वीर अभी तक साफ नहीं हुई है। 13 मार्च को अंतिम सूची जारी की जाएगी। मगर, संभावित प्रत्याशियों ने अभी से राजनीतिक पाशे फेंकने शुरू कर दिए है। मुख्य प्रतिद्वंद्वी को कैसे हराया जाए, इसके लिए कई तरह की तैयारियां की जा रही है। जन सूचना के अधिकार का इस्तेमाल भी इसके लिए किया जा रहा है। पुलिस महकमे से जन सूचना अधिकार के तहत संभावित प्रत्याशियों के आपराधिक इतिहास मांग रहे हैं। रोजाना 10 से 12 आवेदन पोस्टल आर्डर लगाकर किसी न किसी प्रत्याशी के बाबत सूचना मांगी जा रही है।
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पंचायत चुनाव में जीत के लिए तमाम दावेदार अपने पक्ष में चुनावी माहौल बनाने में जुटे हैं। त्योहरों पर बधाइयों के पोस्टर के साथ ही पंचायत चुनाव में खुद के लिए वोट की भी अपील की जा रही है। इसके अलावा जातिगत आंकड़े एकत्रित करने के साथ साथ वोटरों को अपने पक्ष में करने की तैयारियां भी शुरू हो गई है। गत योजना में चुने गए नेताओं के पांच साल के कार्यों का चिट्ठा भी तैयार किया जा रहा है, ताकि उसका इस्तेमाल चुनाव प्रचार के दौरान किया जा सके। इसके साथ ही वर्तमान दावेदारों का आपराधिक रिकार्ड भी तैयार किया जा रहा है। इसके लिए जन सूचना के अधिकार को ढाल बनाया जा रहा है। दावेदारों के खिलाफ दर्ज मामले को खंगाल रहे हैं। इसके पीछे मकसद है कि अगर किसी दावेदार के खिलाफ लिखा-पढ़ी में कोई मामला दर्ज है तो इस बार नई प्रक्रिया के तहत उसका नामांकन रद कराया जा सकता है।
पुलिस महकमे के अनुसार रोजाना 10 से 12 लोग आरटीआई के तहत आवेदन करके संभावित उम्मीदवारों के खिलाफ दर्ज मामले की सूचना मांग रहे हैं। इसे लेकर पुलिस की जन सूचना सेल का काम काफी बढ़ गया गया है। इस बाबत सीओ आलोक कुमार ने बताया कि जन सूचना अधिकार के तहत मांगी जाने वाली सूचना को तय समय सीमा के अंदर आवेदक को उपलब्ध कराया जाता है।
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