केस 1- तीन साल से काट रहा चक्कर, नहीं मिली धनराशि
बड़ौत नगर के अंकित जैन ने बताया कि रोडवेज की ओर से शुरू की गई इस योजना के तहत ओपन एंडेड कार्ड बनवाया था। पहले दो हजार, फिर तीन हजार की नगदी डाली थी। कार्ड बनने के कुछ माह बाद ही कार्ड ने काम करना बंद कर दिया था, शिकायत की तो जानकारी मिली कि यह योजना बंद कर दी गई है।
केस 2- पांच हजार की नगदी फंसी
सिनौली गांव निवासी विपिन कुमार ने बताया कि ओपन एंडेड कार्ड में पांच हजार की नगदी फंसी हुई है, लेकिन विभागीय अधिकारी मात्र आश्वासन दे रहे है। दो साल से चक्कर काट रहा हूूं, लेकिन धनराशि नहीं मिली। यह तो मामले तो उदाहरण मात्र है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार करीब 15 हजार यात्रियों के 50 से 60 लाख रुपये फंसे है।
दूसरी कंपनी को टेंडर देने की प्रक्रिया लगभग पूर्ण
वर्ष 2020 में ओपन एंडेड कार्ड बनाने वाली कंपनी का टेंडर का अनुबंध खत्म होने के बाद रोडवेज ने दूसरी कंपनी के साथ अनुबंध किया है। इसकी टेंडर प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो चुकी है। रोडवेज विभाग के अफसरों का कहना है कि मई माह के अंत तक दूसरी कंपनी विभाग की योजनाओं के तहत काम करना शुरू कर देगी।
डिपो कार्ड की संख्या
मेरठ 4500
सोहराब गेट 2250
गढ़ डिपो 400
भैसाली डिपो 2610
बड़ौत डिपो 150
जल्द लौटाई जाएगी धनराशि
यात्रियों की सुविधाओं के लिए ओपेन एंडेड कार्ड योजना संचालित की गई थी, ताकि बस में छुट्टे रुपये देने की परेशानी से यात्रियों को बचाया जा सकता है। बताया कि जिन लोगों की धनराशि इस कार्ड में फंसी हुई थी, उनकी धनराशि जल्द ही वापस कर दी जाएगी। - केके शर्मा, आरएम