कुर्डी टीले पर खोदाई करते मजदूर। स्रोत ग्रामीण
बड़ौत (बागपत)। कुर्डी टीले पर उत्खनन में बड़ी ईंटों की दीवारें मिलने पर शुक्रवार को खोदाई में तेजी बरती गई है। जहां पर पुरातत्वविदों ने उत्खनन शुरू होने से पहले ही मानव बस्ती होने की उम्मीद जताई थी, जिसके प्रमाण सामने आ रहे हैं।
कुर्डी टीले पर उत्खनन शुरू होने से पहले ही प्राथमिक निरीक्षण के दौरान बिखरे पुरावशेषों देखकर पुरातत्वविदों ने मानव बस्ती होन की उम्मीद जताई थी। जहां पुरावशेषों को देखकर टीले को बहुत खास बताते हुए करीब चार हजार साल पुराना बताया था। टीले में दफन राज को बाहर निकालने के लिए भारतीय विरासत संस्थान की टीम ने टीले पर खोदाई करने की उत्सुकता जताई थी।
टीले पर खोदाई के लिए बनाए गए 12 ट्रेंचों में खोदाई की जा रही है। जहां एक ट्रेंच से बृहस्पतिवार को बड़ी ईंटों की दीवारें सामने आईं थीं। इनके सामने आने से पुरातत्वविद व शोधार्थियों की उम्मीदें दोगुनी हो गईं हैं। ईंटों की दीवारों से मानव बस्ती होने का प्रमाण साफ दिख रहा है। दीवारों को जमीन से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए शुक्रवार को खोदाई तेज कर दी गई है। दीवारों को देखने के लिए जल्द ही संस्थान के पुरातत्व विदों के टीले पर पहुंचने की संभावना जताई गई है।
शोध के बाद देखना है कि ये दीवारें इतिहास की दृष्टि से क्या राज उगलतीं हैं। वहीं तिलवाड़ा टीले पर चल रहे उत्खनन में एक ट्रेंच में मिली चबूतरानुमा आकृति बहुत जल्द जमीन से बाहर आ सकती है, जिसके लिए उत्खनन जारी है।