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उत्खन्न में हड्डियों के अवशेष मिले

Mon, 05 Feb 2018 01:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिनौली
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लाक्षागृह में उत्खनन के दौरान मिले मिट्टी के बर्तन। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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भारतीय पुरातत्व संस्थान और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा बरनावा लाक्षा गृह पर किए जा रहे उत्खनन का कार्य रविवार को भी जारी रहा।
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एएसआई के अधिकारियों के निर्देशन में कई दर्जन कर्मचारी बरनावा मेें उत्खन्न कर रहे हैं। यहां कई महत्वपूर्ण चीजों भी मिल चुकी है। जहां अब तक मिट्टी से बने कुछ महत्वपूर्ण पॉटरी मिली चुकी है। वहीं रविवार को एक बार फिर हड्डियों के अवशेष, मृद भांड के अवशेष और मिट्टी के बर्तनों के मिलने की सूचना मिली है। जिन्हें सुरक्षित जगहों पर रखा गया है। 

उत्खनन स्थल पर बाहरी व्यक्तियों के साथ-साथ आसपास के लोगों को जाने की अनुमति नहीं मिली है। हालांकि उत्खनन कार्य को देखने के लिए आए दिन लोगों की भारी भीड़ उमड़ी रहती है। 
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बरनावा टीले की कोर्ट में सुनवाई आज 
बरनावा में लाक्षा गृह बताए जाने वाले टीले के क्षेत्र की जमीन को लेकर पिछले 47 साल से चल रहे मामले में सोमवार को सुनवाई होगी। सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम में वाद विचाराधीन है। दोनों पक्ष जमीन पर अपना-अपना हक जता रहे हैं।  

बरनावा में खसरा संख्या 3377, जिसका रकबा करीब 36 बीघा है। बरनावा में लाक्षा गृह क्षेत्र की इस जमीन को कब्रिस्तान की बताते हुए वर्ष 1970 में अदालती लड़ाई शुरू हुई । वादी खालिद खां के अधिवक्ता शाहिद अली ने बताया कि सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम में यह प्रकरण चल रहा है।

सोमवार को सुनवाई होनी है। प्रकरण में वादी पक्ष की गवाही हो चुकी है, अब दूसरे पक्ष की गवाही होनी है। कई बार जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव भी बन चुका है।
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क्या है मामला
बरनावा में लाक्षा गृह बताने वाले क्षेत्र में जमीन का विवाद है। वक्फ कब्रिस्तान टीला बताकर खालिद खां कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि टीले पर गुंबद स्थित है वह वर्ष 1370 में दिल्ली से आए बदरुद्दीन शाह की मजार है। हालांकि दूसरे पक्ष का कहना है कि  वक्फ बोर्ड का तर्क गलत है। यहां पर संस्कृत महाविद्यालय का संचालन भी किया जा रहा है।
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